‘शबाना और मैं सड़क पर सोते हैं...’, जावेद अख्तर ने पाक एक्ट्रेस बुशरा अंसारी को दिया ऐसा करारा जवाब, पढ़कर खुश हो जाएगा दिल
अप्रैल महीने में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद मशहूर गीतकार और स्क्रीनराइटर जावेद अख्तर ने भारत सरकार से पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा एक्शन लेने की मांग की थी। इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया, जब एक पाकिस्तानी अभिनेत्री बुशरा अंसारी ने जावेद अख्तर पर तीखे शब्दों में निशाना साधा और उन्हें खरी-खोटी सुनाई।
बुशरा अंसारी का विवादित वीडियो वायरल
बुशरा अंसारी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें उन्होंने जावेद अख्तर के बारे में कई आपत्तिजनक बातें कहीं। उन्होंने कहा था कि जावेद को नसीरुद्दीन शाह और अन्य कलाकारों की तरह चुप रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने तंज करते हुए कहा था कि जावेद को बॉम्बे में किराये पर मकान भी नहीं मिल रहा था। उनका यह बयान जावेद और उनके समर्थकों के लिए कड़वा घूंसा साबित हुआ।
जावेद अख्तर का जवाब: "मैं एक भारतीय हूं"
अब जावेद अख्तर ने पहली बार इस विवादित बयान पर प्रतिक्रिया दी है। एक यूट्यूब चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "एक मशहूर पाकिस्तानी टीवी कलाकार बुशरा अंसारी ने गुस्से में मुझसे पूछा था कि मैं चुप क्यों नहीं रहता। उन्होंने कहा कि मुझे नसीरुद्दीन शाह की तरह चुप रहना चाहिए। लेकिन वह कौन होती हैं मुझे ये सलाह देने वाली?" जावेद ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनकी जिंदगी में कई समस्याएं हो सकती हैं, लेकिन जब बात उनकी राष्ट्रीय पहचान की आती है तो वे एक भारतीय हैं। यह साफ इशारा था कि बुशरा के आरोप और तंज उनके लिए कोई मायने नहीं रखते।
शबाना आजमी को फ्लैट नहीं मिला, ये सच है
बुशरा के उस बयान का भी जावेद ने खंडन किया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें बॉम्बे में किराये पर मकान नहीं मिल रहा। जावेद ने हंसी-मजाक के साथ कहा, "हां, मैं और शबाना आजकल फुटपाथ पर रहते हैं। लेकिन सच यह है कि करीब 25 साल पहले शबाना आजमी एक फ्लैट खरीदना चाहती थीं, लेकिन उन्होंने मना कर दिया क्योंकि वह मुस्लिम थीं।" जावेद ने यह भी बताया कि शबाना आजमी के माता-पिता सिंध से आए थे और विभाजन के दौरान वहां से निकाले गए थे। यह अनुभव उनके लिए बेहद दर्दनाक था और उस समय की कड़वाहट आज भी उनके दिलों में मौजूद है।
विभाजन की चोटें और वर्तमान विवाद
जावेद अख्तर ने कहा कि विभाजन की वजह से सिंध के लोगों को भारी नुकसान सहना पड़ा है और यह घाव आज भी गहरे हैं। उन्होंने कहा, "यह कड़वाहट हम पर निकाली जा रही है, लेकिन इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हमें यहां बहुत प्यार मिला है। उन लोगों को अपने देश के इतिहास को देखना चाहिए।" यह बयान स्पष्ट करता है कि जावेद ने इस विवाद को केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं देखा, बल्कि इतिहास और भावनाओं के संदर्भ में भी इसे समझने की कोशिश की है।
विवाद और प्रतिक्रियाओं का असर
बुशरा अंसारी और जावेद अख्तर के बीच यह विवाद सोशल मीडिया और मीडिया में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों ही कलाकारों के समर्थक अपने-अपने पक्ष में आवाज उठा रहे हैं। इस मामले ने भारत-पाकिस्तान के बीच चल रही राजनीतिक और सांस्कृतिक लड़ाई को भी एक बार फिर से ताजा कर दिया है।
निष्कर्ष
अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ यह विवाद केवल एक बयानबाजी नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच गहरे भावनात्मक और राजनीतिक तनाव को भी दर्शाता है। जावेद अख्तर ने बुशरा अंसारी के विवादित बयान का साहसिक और तर्कसंगत जवाब दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी राष्ट्रीय पहचान और इतिहास की व्यथा को भी व्यक्त किया है।
यह विवाद दर्शाता है कि कला और राजनीति के बीच जटिल संबंध हैं और कलाकार जब अपने विचार व्यक्त करते हैं तो वे कई बार आलोचना और विवादों का सामना भी करते हैं। जावेद अख्तर और बुशरा अंसारी के इस वाक्य-विवाद ने एक बार फिर यह साबित या है कि कला की दुनिया में भी राजनीति की गूंज और संवेदनाएं गहराई तक मौजूद रहती हैं।

