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'कुछ लोग जीवन में मजबूत सहारा बन जाते हैं...', अशोक पंडित की फैमिली से मिलकर गदगद अनुपम खेर

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। अभिनेता अनुपम खेर सोशल मीडिया पर खास पोस्ट कर अक्सर फैंस के साथ कनेक्ट रहते हैं। उन्होंने लेटेस्ट पोस्ट में मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच मिले प्यारे दोस्त अशोक पंडित और उनके परिवार के साथ अपनी लंबी दोस्ती और अपनत्व की बात की।
'कुछ लोग जीवन में मजबूत सहारा बन जाते हैं...', अशोक पंडित की फैमिली से मिलकर गदगद अनुपम खेर

नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। अभिनेता अनुपम खेर सोशल मीडिया पर खास पोस्ट कर अक्सर फैंस के साथ कनेक्ट रहते हैं। उन्होंने लेटेस्ट पोस्ट में मुंबई की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच मिले प्यारे दोस्त अशोक पंडित और उनके परिवार के साथ अपनी लंबी दोस्ती और अपनत्व की बात की।

इंस्टाग्राम पर दो तस्वीरें पोस्ट करते हुए अनुपम खेर ने फिल्म निर्माता और सोशल एक्टिविस्ट अशोक पंडित और उनके परिवार के प्रति गहरी भावनाएं व्यक्त कीं। अनुपम ने तस्वीरों के साथ लिखा कि मुंबई जैसे तेज रफ्तार शहर में जहां रिश्ते अक्सर क्षणिक लगते हैं, कुछ लोग जीवन में मजबूत सहारा बन जाते हैं। उनके लिए अशोक पंडित ऐसे ही इंसान हैं।

अनुपम खेर और अशोक पंडित की दोस्ती लंबे समय से चर्चित रही है। दोनों अक्सर एक-दूसरे के साथ दिखते हैं और मुश्किल वक्त में भी साथ देते हैं।

अनुपम ने बताया, "वर्षों से अशोक पंडित उनकी जिंदगी में अटूट दोस्ती की मिसाल रहे और हमेशा मेरे साथ खड़े रहे हैं। कोई शोर-शराबा नहीं, कोई ड्रामा नहीं, बस उनकी मौजूदगी ही इतनी मजबूत है कि यह भरोसा दिलाती है कि आप अकेले नहीं हैं।''

उन्होंने कहा कि अशोक की दुनिया धीरे-धीरे उनकी दुनिया भी बन गई। शुरू में अशोक के परिवार के सदस्यों नीरजा, राज, शारिका और तपस से मिला रिश्ता अब अपना परिवार बन चुका है। यह रिश्ता किसी बड़े ऐलान से नहीं, बल्कि प्यार, देखभाल और साथ बिताए अनगिनत खूबसूरत पलों से गहरा हुआ है।"

अनुपम ने भावुक होकर लिखा कि सबसे गहरे और सच्चे रिश्ते वे होते हैं, जिनकी कोई योजना नहीं बनाई जाती। वे बस धीरे-धीरे दिल में जगह बना लेते हैं और हमेशा के लिए रह जाते हैं। उन्होंने अशोक को अपना दोस्त और भाई कहते हुए शुक्रिया भी अदा किया। साथ ही अशोक के पूरे परिवार को धन्यवाद दिया कि उन्होंने उन्हें अपने परिवार का हिस्सा बनाया।

अनुपम ने कहा कि वे इस रिश्ते को शब्दों से कहीं ज्यादा महत्व देते हैं, लेकिन कभी-कभी भावनाओं को जाहिर करना जरूरी हो जाता है।

--आईएएनएस

एमटी/एबीएम

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