'विश्वगुरु' के दावे पर अनुराधा पौडवाल के सवाल, वीडियो में देंखे शिक्षा व्यवस्था और मंदिर सुरक्षा को लेकर कही ये बात
राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और पद्मश्री सम्मानित गायिका अनुराधा पौडवाल ने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में देश की शिक्षा व्यवस्था और 'विश्वगुरु' की अवधारणा को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यदि भारत को वास्तव में विश्वगुरु बनना है, तो केवल नारे देने के बजाय शिक्षा और बुनियादी व्यवस्थाओं पर अधिक ध्यान देना होगा।
अनुराधा पौडवाल ने हाल ही में पत्रकार शुभांकर मिश्रा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान कहा कि उनके मन में भी कभी यह विश्वास था कि भारत विश्वगुरु बनेगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखकर कई सवाल उठते हैं।
'विश्वगुरु बनने के लिए मजबूत आधार जरूरी'
पॉडकास्ट में अनुराधा पौडवाल ने कहा,
"कुछ सालों पहले तक मेरे मन में बहुत आता था कि हम विश्वगुरु बनेंगे, लेकिन अभी मैं देखती हूं कि विश्वगुरु को विरोधाभासी करने वाली चीजें ही ज्यादा हो रही हैं। कहां से हम विश्वगुरु बनेंगे। या तो हम 'विश्वगुरु-विश्वगुरु' कहना बंद करें या फिर इन विरोधाभासों को खत्म करें।"
उन्होंने शिक्षा व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि यदि बड़ी संख्या में स्कूल बंद हैं, तो यह चिंता का विषय है। उन्होंने सवाल उठाया कि मजबूत शिक्षा व्यवस्था के बिना विश्वगुरु बनने का आधार कैसे तैयार होगा।
शिक्षा पर दिया जोर
अनुराधा पौडवाल ने कहा,
"क्या हमें शिक्षित नहीं बनना था? मुझे समझ नहीं आता कि हम एजुकेटेड बनना चाहते हैं, लेकिन हमारे देश में 93 हजार स्कूल बंद पड़े हैं। तो विश्वगुरु का बेस क्या है? ख्वाब के ऊपर तो आप चल नहीं सकते, आपको कुछ तो करना पड़ेगा।"
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए ठोस योजनाएं और जमीनी स्तर पर काम जरूरी है।
मंदिर सुरक्षा का भी किया जिक्र
बातचीत के दौरान अनुराधा पौडवाल ने हाल में सामने आए मंदिरों से जुड़े चोरी के मामलों का उल्लेख करते हुए कहा,
"राम राज्य की बात करते हैं, इधर तो मंदिर पर ही डाका हो गया।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह विश्वगुरु बनने की अवधारणा के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उनका कहना है कि इस लक्ष्य तक पहुंचने के लिए किन-किन क्षेत्रों में सुधार जरूरी है, इस पर स्पष्ट रोडमैप होना चाहिए।
उन्होंने कहा,
"मैं विश्वगुरु के खिलाफ नहीं हूं, लेकिन इससे जुड़ी हुई जो चीजें हैं, उनकी सूची होनी चाहिए, ताकि हम उस दिशा में आगे बढ़ सकें।"
सोशल मीडिया पर शुरू हुई चर्चा
अनुराधा पौडवाल के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर विभिन्न तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ लोग उनके बयान से असहमति जता रहे हैं।
हालांकि, केंद्र सरकार या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सार्वजनिक बहस का हिस्सा बना बयान
अनुराधा पौडवाल का यह बयान ऐसे समय आया है, जब शिक्षा, विकास और देश के दीर्घकालिक लक्ष्यों को लेकर सार्वजनिक विमर्श जारी है। उनके बयान ने एक बार फिर इस बहस को हवा दी है कि बड़े राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ-साथ शिक्षा, बुनियादी ढांचे और संस्थागत सुधारों पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।

