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Anuradha Paudwal Birthday: 15 साल की उम्र में शादी, पति और बेटे को खोने का दर्द; भजनों से घर-घर में बनाई पहचान

Anuradha Paudwal Birthday: 15 साल की उम्र में शादी, पति और बेटे को खोने का दर्द; भजनों से घर-घर में बनाई पहचान

भारतीय संगीत जगत में अनुराधा पौडवाल का नाम उन गायिकाओं में शामिल है, जिन्होंने फिल्मी गीतों के साथ-साथ भक्ति संगीत में भी अपनी अलग पहचान बनाई। उनकी सुरीली आवाज ने 80 और 90 के दशक में कई लोकप्रिय गानों को यादगार बनाया। बाद में उन्होंने भजनों और आरतियों के जरिए भी करोड़ों लोगों के दिलों में जगह बनाई।

अनुराधा की जिंदगी जितनी सफलता और शोहरत से भरी रही, उतने ही मुश्किल दौर से भी उन्हें गुजरना पड़ा। कम उम्र में शादी, पति को खोने का दुख और बेटे के निधन जैसी घटनाओं ने उनकी निजी जिंदगी को गहराई से प्रभावित किया। उनके जन्मदिन के मौके पर आइए जानते हैं उनके संगीत सफर और जिंदगी से जुड़े कुछ खास पहलुओं के बारे में।

लता मंगेशकर और आशा भोसले से मिली प्रेरणा

अनुराधा पौडवाल का जन्म 27 अक्टूबर 1954 को कर्नाटक के कारवार में हुआ था। उनका मूल नाम अलका नाडकर्णी बताया जाता है। संगीत की औपचारिक ट्रेनिंग लेने के बजाय उन्होंने लता मंगेशकर और आशा भोसले जैसी दिग्गज गायिकाओं के गानों से प्रेरणा लेकर अपनी गायकी को निखारा।

धीरे-धीरे उनकी आवाज ने संगीत जगत में पहचान बनानी शुरू की। उनकी गायकी में मिठास और भावनात्मक अंदाज ने उन्हें दूसरे गायकों से अलग पहचान दिलाई।

कम उम्र में हुई शादी, फिर पति को खो दिया

अनुराधा पौडवाल की शादी संगीतकार अरुण पौडवाल से हुई थी, जो संगीतकार एस. डी. बर्मन के सहायक के रूप में भी काम कर चुके थे। मीडिया में उनकी शादी कम उम्र में होने का जिक्र मिलता है।

साल 1991 में एक सड़क हादसे में अरुण पौडवाल का निधन हो गया। इस घटना ने अनुराधा की जिंदगी को बड़ा झटका दिया। पति के निधन के बाद उन्होंने अपने परिवार और करियर को संभालते हुए आगे का सफर जारी रखा।

बेटे आदित्य के निधन से लगा गहरा सदमा

अनुराधा पौडवाल की निजी जिंदगी में एक और दुखद घटना तब हुई, जब उनके बेटे आदित्य पौडवाल का निधन हो गया। आदित्य संगीतकार और गायक थे। साल 2020 में किडनी संबंधी बीमारी के कारण 35 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया।

अनुराधा की बेटी कविता पौडवाल भी संगीत की दुनिया से जुड़ी हैं। परिवार में हुए इन दुखद हादसों के बावजूद अनुराधा ने संगीत से अपना जुड़ाव बनाए रखा।

फिल्म ‘अभिमान’ से शुरू हुआ बॉलीवुड का सफर

अनुराधा पौडवाल ने साल 1973 में अमिताभ बच्चन और जया बच्चन की फिल्म ‘अभिमान’ से प्लेबैक सिंगिंग के क्षेत्र में कदम रखा। इस फिल्म में उन्होंने संस्कृत श्लोक गाया था। इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में अपनी आवाज दी और धीरे-धीरे हिंदी फिल्म संगीत में लोकप्रियता हासिल की।

उन्हें बड़ी पहचान साल 1983 में आई फिल्म ‘हीरो’ के गीत ‘तू मेरा जानू है’ से मिली। इसके बाद उन्होंने ‘बहुत प्यार करते हैं’, ‘तू मेरी जिंदगी है’, ‘नजर के सामने’, ‘दिल है कि मानता नहीं’ और ‘तुम्हें अपना बनाने की कसम खाई’ जैसे कई लोकप्रिय गीत गाए।

भक्ति गीतों ने दिलाई अलग पहचान

90 के दशक में अनुराधा पौडवाल ने फिल्मी गानों के साथ-साथ भक्ति संगीत पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। टी-सीरीज के भक्ति संगीत प्रोजेक्ट्स के जरिए उनकी आवाज घर-घर तक पहुंची।

‘ओम जय अंबे गौरी’, ‘जय मां अंबे जय जगदंबे’, ‘महालक्ष्मी अष्टकम’, ‘आरती कुंज बिहारी की’, ‘हे राम’ और ‘मिलता है सच्चा सुख केवल शिव तुम्हारे चरणों में’ जैसे भक्ति गीतों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई। उनकी आवाज में गाए गए भजनों और आरतियों को आज भी बड़ी संख्या में लोग सुनते हैं।

बॉलीवुड से दूरी बनाने का क्या था कारण?

फिल्मी संगीत में सफलता हासिल करने के बाद अनुराधा पौडवाल ने 90 के दशक में भक्ति संगीत पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया। उन्होंने फिल्मों में गाने कम कर दिए और धार्मिक गीतों के जरिए अपनी अलग पहचान मजबूत की।

फिल्मफेयर पुरस्कारों के मामले में भी उनका करियर उल्लेखनीय रहा। उन्होंने 1990, 1991 और 1992 में लगातार तीन वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता।

अनुराधा पौडवाल का सफर इस बात का उदाहरण है कि एक कलाकार अपनी प्रतिभा के दम पर अलग-अलग संगीत शैलियों में पहचान बना सकता है। फिल्मी गीतों से लेकर भजनों तक, उनकी आवाज ने भारतीय संगीत जगत में खास जगह बनाई है।

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