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हेमलता बाली : 'अंखियों के झरोखों से' मिली प्रसिद्धि, 38 भाषाओं में गाए 5 हजार से अधिक गाने

मुंबई, 15 अगस्त (आईएएनएस)। अपनी मखमली आवाज से सभी पर जादू बिखेरने वाली प्लेबैक सिंगर हेमलता बाली के गाए अनूठे गीत आज भी कानों में रस घोल देते हैं। 16 अगस्त 1954 को जन्मीं हेमलता बॉलीवुड की एक शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित प्लेबैक सिंगर हैं।

मुंबई, 15 अगस्त (आईएएनएस)। अपनी मखमली आवाज से सभी पर जादू बिखेरने वाली प्लेबैक सिंगर हेमलता बाली के गाए अनूठे गीत आज भी कानों में रस घोल देते हैं। 16 अगस्त 1954 को जन्मीं हेमलता बॉलीवुड की एक शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित प्लेबैक सिंगर हैं।

'अंखियों के झरोखों से' गीत गाने वाली हेमलता ने 13 साल की उम्र में ही सिंगिंग के क्षेत्र में कदम रखा था। हेमलता ने अपने करियर में 5,000 से अधिक गीत गाए। उन्हें 1977-81 की अवधि में पांच बार फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। 1977 में फिल्म 'चितचोर' के लिए एक बार यह पुरस्कार जीता था, जिसमें उन्होंने येसुदास के साथ युगल गीत "तू जो मेरे सुर में" गाया था, जिसकी रचना रवींद्र जैन ने की थी।

हेमलता का जन्म हैदराबाद में लता भट्ट के रूप में एक मारवाड़ी ब्राह्मण परिवार में हुआ था, लेकिन उनका परिवार मूल रूप से राजस्थान के चुरू जिले के सेहला गांव का निवासी है। गाने का शौक उन्हें बचपन से ही था। उन्होंने अपना बचपन कलकत्ता (अब कोलकाता) में बिताया। उनका विवाह योगेश बाली से हुआ था, जो फिल्म अभिनेत्री योगिता बाली के छोटे भाई थे। हेमलता के पति का 1988 में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वह अपने बेटे आदित्य के साथ रहती हैं।

हेमलता ने अपने पिता और गुरु पंडित जयचंद भट्ट की तरह शास्त्रीय संगीत की शिक्षा प्राप्त की। बाद में वह कलकत्ता से मुंबई आ गईं। उन्होंने काफी संघर्ष के बाद कल्याण जी आनंद जी और लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथ अपने करियर की शुरुआत की। उन्होंने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, दिग्गज गायिका लता मंगेशकर और आशा भोसले के साथ भी गाने गाए।

हेमलता कव्वाली, हल्के-फुल्के गाने, गजल, भजन और अन्य कई शैलियों में अपनी बहुमुखी प्रतिभा के लिए जानी जाती हैं। बाद में, रवींद्र जैन के साथ मिलकर उन्होंने कई अन्य गानों पर काम किया।

हेमलता ने विभिन्न भारतीय फिल्मों, संगीत, टीवी धारावाहिकों और संगीत एल्बम को अपनी मधुर आवाज दी। इसके साथ ही, उन्होंने 'अंखियों के झरोखों से', 'कौन दिशा में लेके चला रे बटोहिया', 'तू इस तरह से मेरी जिंदगी में’ जैसे यादगार गीत गाए हैं, जो आज भी संगीत प्रेमियों के सिर चढ़कर बोलते हैं।

38 भाषाओं में गाने गा चुकीं हेमलता न सिर्फ अपने करियर का, बल्कि अपनी जिंदगी का भी दूसरा दौर जी रही हैं। उनके पुत्र आदित्य बाली अभिनय की दुनिया में पैर जमाने को तैयार हैं।

--आईएएनएस

ओपी/एबीएम

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