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अच्छी फिल्म खुद चलती है, इवेंट की जरूरत नहीं: अक्षय कुमार

मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार और फिल्ममेकर अहमद खान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत में अपनी आगामी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' को लेकर बात की। इस दौरान दोनों ने फिल्म की विशाल स्टार कास्ट, अपने पेशेवर रिश्ते, शूटिंग के यादगार अनुभवों और मल्टी-स्टारर फिल्म बनाने की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की।
अच्छी फिल्म खुद चलती है, इवेंट की जरूरत नहीं: अक्षय कुमार

मुंबई, 23 जून (आईएएनएस)। बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार और फिल्ममेकर अहमद खान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस के साथ बातचीत में अपनी आगामी फिल्म 'वेलकम टू द जंगल' को लेकर बात की। इस दौरान दोनों ने फिल्म की विशाल स्टार कास्ट, अपने पेशेवर रिश्ते, शूटिंग के यादगार अनुभवों और मल्टी-स्टारर फिल्म बनाने की चुनौतियों पर खुलकर चर्चा की।

बातचीत के दौरान उन्होंने दिग्गज अभिनेत्री फरीदा जलाल के भारतीय सिनेमा में योगदान और उनके साथ काम करने के अनुभवों को भी साझा किया। इसके अलावा, फिल्म निर्माण की प्रक्रिया और इतने बड़े कलाकारों के साथ काम करने के दौरान आने वाले उत्साह और चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। अक्षय कुमार ने इस दौरान भोजपुरी सिनेमा और उसकी बढ़ती लोकप्रियता पर भी अपनी राय व्यक्त की।

अक्षय कुमार ने कहा कि किसी फिल्म का सफल होना केवल उसके इर्द-गिर्द बने माहौल या बड़े इवेंट पर निर्भर नहीं करता। उन्होंने कहा कि जो भी फिल्म अच्छी होती है, वह चलती है। जरूरी नहीं कि वह कोई 'इवेंट फिल्म' ही हो। अगर फिल्म अच्छी है तो उसे दर्शक मिल ही जाते हैं, लेकिन बात फिर वहीं आ जाती है, हर फिल्म की अपनी किस्मत होती है। भले ही उसके आसपास कोई बड़ा इवेंट या हाइप न हो, अगर उसे सफल होना है, तो वह फिल्म किसी न किसी तरह चल ही जाएगी। चाहे कुछ भी हो।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 'सैयारा' फिल्म में कौन सा इवेंट था? कुछ भी नहीं था। उसके गाने पॉपुलर हुए और फिल्म का रोमांस दर्शकों को पसंद आया। एक्टर और एक्ट्रेस, दोनों ने बहुत अच्छा काम किया।

मल्टी-स्टारर फिल्मों में कलाकारों के बीच प्रतिस्पर्धा या स्क्रीन स्पेस को लेकर भी अक्षय कुमार ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि 'वेलकम टू द जंगल' की टीम में ऐसा कोई माहौल नहीं था, जहां कोई कलाकार खुद को आगे दिखाने या दूसरे से अधिक महत्व पाने की कोशिश कर रहा हो।

अक्षय कुमार ने कहा कि हम एक फिल्म बना रहे थे। कोई भी किसी को खुश करने या किसी से आगे निकलने की कोशिश नहीं कर रहा था। सभी को यह बात पता थी। एक भी व्यक्ति ने आकर यह नहीं कहा कि 'मेरा डायलॉग कम है' या 'उसका डायलॉग ज्यादा है।' ऐसा कुछ भी नहीं था।

उन्होंने आगे बताया कि मैं ऐसे कई लोगों को जानता हूं जो अपने डायलॉग दूसरों को दे रहे थे और कह रहे थे, 'यह लाइन तुम बोलो' या 'यह डायलॉग तुम ले लो।' ऐसी कोई बात बिल्कुल भी नहीं थी।

--आईएएनएस

पीएसके/डीकेपी

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