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आशा भोसले की सिफारिश से मिली थी पहली फिल्म, कभी कोरस में गाने वाली पद्मिनी कोल्हापुरे ने ऐसे बनाई पहचान

मुंबई, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने बचपन से ही फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया था और बड़े होते-होते अपनी अलग पहचान बना ली। पद्मिनी कोल्हापुरे भी उन्हीं अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे एक बाल कलाकार से हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री बन गईं। '

मुंबई, 31 अक्टूबर (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने बचपन से ही फिल्मों की दुनिया में कदम रख दिया था और बड़े होते-होते अपनी अलग पहचान बना ली। पद्मिनी कोल्हापुरे भी उन्हीं अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू किया और धीरे-धीरे एक बाल कलाकार से हिंदी सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री बन गईं। '

सत्यम शिवम सुंदरम', 'इंसाफ का तराजू' और 'प्रेम रोग' जैसी फिल्मों में उनके काम को आज भी याद किया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि फिल्मों में आने से पहले वह अपनी बहन के साथ कोरस गाया करती थीं। उनकी पहली फिल्म मिलने के पीछे भी एक खास किस्सा है, जिसमें दिग्गज गायिका आशा भोसले की अहम भूमिका रही।

पद्मिनी कोल्हापुरे का जन्म 1 नवंबर 1965 को मुंबई में हुआ था। उनके पिता पंडित पंढरीनाथ कोल्हापुरे शास्त्रीय संगीत से जुड़े थे, जबकि उनकी मां अनुपमा एयरलाइन में काम करती थीं। पद्मिनी का परिवार संगीत और कला से जुड़ा रहा है। उनकी बहन शिवांगी कोल्हापुरे भी संगीत और फिल्मों से जुड़ी हैं। शिवांगी की शादी अभिनेता शक्ति कपूर से हुई और उनकी बेटी श्रद्धा कपूर आज बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। इस तरह पद्मिनी का रिश्ता कपूर परिवार से भी जुड़ता है।

पद्मिनी को बचपन से ही गाने और डांस करने का शौक था। उन्होंने महज सात साल की उम्र में फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। शुरुआत में वह अपनी बहन शिवांगी के साथ फिल्मों के गानों में कोरस गाती थीं। 'यादों की बारात', 'किताब' और 'दुश्मन दोस्त' जैसी फिल्मों के गानों में उनकी आवाज शामिल रही। इसी दौरान उनकी मुलाकात दिग्गज गायिका आशा भोसले से हुई, जो रिश्ते में उनकी बुआ लगती थीं। पद्मिनी के पिता पंढरीनाथ, आशा भोसले और लता मंगेशकर के फर्स्ट कजिन थे। पद्मिनी उन्हें प्यार से 'आशा आत्या' कहती थीं।

पद्मिनी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि आशा भोसले ने ही उन्हें अभिनेता देव आनंद से मिलवाया था। आशा भोसले ने देव आनंद से कहा था कि अगर उनके पास पद्मिनी के लिए कोई काम हो तो उन्हें मौका दें। इस मुलाकात के बाद देव आनंद ने उन्हें अपनी फिल्म 'इश्क इश्क इश्क' में काम दिया। इस तरह पद्मिनी को उनकी पहली फिल्म मिली। उस समय वह काफी छोटी थीं और उन्हें इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि आगे चलकर वह हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री बनेंगी।

इसके बाद पद्मिनी ने 'जिंदगी', 'ड्रीम गर्ल' और 'सत्यम शिवम सुंदरम' जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। राज कपूर की फिल्म 'सत्यम शिवम सुंदरम' में उन्होंने छोटी रूपा का किरदार निभाया था। इस फिल्म से उन्हें काफी पहचान मिली। राज कपूर ने बाद में उन्हें फिल्म 'प्रेम रोग' में मुख्य भूमिका भी दी। इस फिल्म में उनके साथ ऋषि कपूर नजर आए थे। फिल्म में पद्मिनी ने मनोरमा नाम की एक विधवा महिला का किरदार निभाया था, जिसे समाज के भेदभाव और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

साल 1980 में आई फिल्म 'इंसाफ का तराजू' में उनके काम की काफी तारीफ हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। उस समय उनकी उम्र महज 15 साल थी। इसके बाद 1982 में 'प्रेम रोग' के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला। इतनी कम उम्र में लगातार दो बड़े सम्मान हासिल करना उनके करियर की बड़ी उपलब्धि रही।

पद्मिनी ने इसके बाद 'आहिस्ता आहिस्ता', 'विधाता', 'वो सात दिन', 'प्यार झुकता नहीं', 'सौतन', 'स्वर्ग से सुंदर' और 'प्यार के काबिल' जैसी फिल्मों में काम किया। उन्होंने हिंदी फिल्मों के साथ मराठी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। कुछ समय तक फिल्मों से दूरी बनाने के बाद उन्होंने दोबारा एक्टिंग शुरू की। 'चिमनी पाखर', 'फटा पोस्टर निकला हीरो', 'पानीपत' और 'प्रवास' जैसी फिल्मों में भी वह नजर आईं।

निजी जिंदगी की बात करें तो पद्मिनी ने 1986 में फिल्म निर्माता प्रदीप शर्मा से शादी की थी। दोनों का एक बेटा प्रियंक शर्मा है, जो अभिनय और फिल्म निर्माण से जुड़ा है।

--आईएएनएस

पीके/वीसी

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