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आशा भोसले के निधन पर पीएम मोदी ने जताया दुख, कहा- मुलाकातों की यादें हमेशा संजोकर रखूंगा

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले के निधन पर दुख जताया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने आशा भोसले के साथ अपनी पुरानी मुलाकात की कई फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की और कहा उनके साथ हुई मुलाकातों की यादें हमेशा संजोकर रखेंगे।
आशा भोसले के निधन पर पीएम मोदी ने जताया दुख, कहा- मुलाकातों की यादें हमेशा संजोकर रखूंगा

नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय संगीत जगत की दिग्गज गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित आशा भोसले के निधन पर दुख जताया। इसके साथ ही पीएम मोदी ने आशा भोसले के साथ अपनी पुरानी मुलाकात की कई फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की और कहा उनके साथ हुई मुलाकातों की यादें हमेशा संजोकर रखेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि आशा की असाधारण संगीत यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। चाहे उनकी दिल को छू लेने वाली धुनें हों या उनकी जोशीली रचनाएं।

पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ''भारत की सबसे आइकॉनिक और बहुमुखी आवाजों में से एक आशा भोसले जी के निधन से मैं बहुत दुखी हूं। दशकों तक चली उनकी असाधारण संगीत यात्रा ने हमारी सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया और दुनिया भर में अनगिनत दिलों को छुआ। चाहे उनकी दिल को छू लेने वाली धुनें हों या उनकी जोशीली रचनाएं, उनकी आवाज हमेशा बेमिसाल रही। उनके साथ हुई मेरी मुलाकातों की यादें मैं हमेशा संजोकर रखूंगा। उनके परिवार, प्रशंसकों और संगीत प्रेमियों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं। वह आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और उनके गीत हमेशा लोगों के जीवन में गूंजते रहेंगे।''

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आशा भोसले के निधन पर दुख जताते हुए एक्स पोस्ट में लिखा, ''आज हर भारतीय और विशेषकर मेरे जैसे हर संगीत प्रेमी के लिए दुखद दिन है, जब हम सबकी प्रिय आशा भोसले जी हमारे बीच नहीं रहीं। आशा ताई ने न सिर्फ अपनी मधुर आवाज और अद्वितीय प्रतिभा से एक अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने सुरों से भारतीय संगीत को भी और अधिक समृद्ध किया। हर तरह के संगीत में ढल जाने की उनकी अनोखी प्रतिभा हर व्यक्ति का दिल जीत लेती थी। अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को छूने वालीं आशा जी ने हिंदी, मराठी, बांग्ला, तमिल, गुजराती सहित अनेक भाषाओं के साथ-साथ लोकगीतों में भी अमिट छाप छोड़ी।''

उन्होंने आगे लिखा, ''आशा ताई की आवाज में जितनी कोमलता थी, उनके व्यवहार में भी उतनी ही सादगी और आत्मीयता थी। उनसे जब भी मुलाकात होती थी, संगीत और कला जैसे अनेक विषयों पर लंबी बातें होती थीं। आज वे भले ही हमारे बीच नहीं हैं, पर अपनी आवाज से वे सदैव हमारे दिलों में रहेंगी। ईश्वर आशा जी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। उनके परिजनों और असंख्य प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।''

--आईएएनएस

एसके/एएस

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