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आमिर खान के चचेरे भाई हैं तारिक खान, कभी गानों से बने थे 70 के दशक के रॉकस्टार

मुंबई, 8 नंवबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली, लेकिन समय के साथ वे फिल्मों से दूर हो गए। ऐसे ही एक अभिनेता हैं तारिक खान। 70 के दशक में अपनी चॉकलेटी इमेज, शानदार डांस और गानों में गिटार बजाने के अंदाज से उन्होंने खूब लोकप्रियता हासिल की थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि तारिक खान बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान के चचेरे भाई हैं।

मुंबई, 8 नंवबर (आईएएनएस)। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में जगह बना ली, लेकिन समय के साथ वे फिल्मों से दूर हो गए। ऐसे ही एक अभिनेता हैं तारिक खान। 70 के दशक में अपनी चॉकलेटी इमेज, शानदार डांस और गानों में गिटार बजाने के अंदाज से उन्होंने खूब लोकप्रियता हासिल की थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि तारिक खान बॉलीवुड सुपरस्टार आमिर खान के चचेरे भाई हैं।

तारिक खान का जन्म 9 नवंबर 1951 को लखनऊ में हुआ था। उनका परिवार पहले से ही फिल्मों से जुड़ा हुआ था। उनके मामा नासिर हुसैन हिंदी फिल्मों के जाने-माने निर्माता और निर्देशक थे। वहीं, आमिर खान उनके चचेरे भाई हैं।

तारिक की फिल्मों में आने की कहानी भी काफी दिलचस्प है। उन्होंने शुरुआत में नासिर हुसैन की फिल्म 'कारवां' (1971) में उनके साथ काम किया था। इसके बाद साल 1973 में आई फिल्म 'यादों की बारात' से बतौर अभिनेता उन्हें बड़ी पहचान मिली। इस फिल्म में उनके साथ धर्मेंद्र, विजय अरोड़ा और जीनत अमान जैसे कलाकार थे।

फिल्म के गाने 'आप के कमरे में' और 'लेकर हम दीवाना दिल' में तारिक के डांस और गिटार बजाने के अंदाज ने युवाओं को खूब आकर्षित किया। वह जल्द ही 70 के दशक के चर्चित युवा सितारों में शामिल हो गए। खास बात यह है कि इसी फिल्म में आमिर खान ने उनके किरदार मोंटो के बचपन का रोल निभाया था।

'यादों की बारात' के बाद तारिक साल 1975 में फिल्म 'जख्मी' में नजर आए। इसके बाद 1977 में आई फिल्म 'हम किसी से कम नहीं' ने उनकी लोकप्रियता को और बढ़ाया। इस फिल्म में ऋषि कपूर, काजल किरण और अमजद खान भी अहम भूमिकाओं में थे। इस फिल्म के लिए तारिक को फिल्मफेयर के बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर पुरस्कार के लिए नामांकन भी मिला था।

इसके अलावा उन्होंने 'जमाने को दिखाना है', 'शौकीन', 'पसंद अपनी अपनी', 'मंजिल मंजिल', 'बात बन जाए' और 'जबरदस्त' जैसी फिल्मों में काम किया। हालांकि, बाद के दिनों में उन्हें पहले जैसी सफलता नहीं मिली।

एक समय ऐसा था जब तारिक के पास फिल्मों की कमी नहीं थी लेकिन धीरे-धीरे उन्हें मनचाहा काम मिलना बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने फिल्मी दुनिया से अलग रास्ता चुन लिया। उनकी आखिरी फिल्म 'मेरा दामाद' 1995 में आई थी।

एक इंटरव्यू में तारिक ने बताया था कि फिल्मों में लगातार काम पाने की परेशानी के कारण उन्होंने अपना काम बदलने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने कार्गो, कूरियर और ट्रैवल के क्षेत्र में काम किया।

--आईएएनएस

पीके/पीएम

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