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नेहा धूपिया ने बताया कैसे मदरहुड ने बदली उनकी जिंदगी, बताया- 90 प्रतिशत दिमाग बच्चों में ही लगा रहता है

मुंबई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री नेहा धूपिया आगामी रियलिटी शो 'रोडीज रीबर्थ' के 20वें एडिशन में एक गैंग लीडर के तौर पर नजर आएंगी। अभिनेत्री ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जीवन में किस तरह के बदलाव आए हैं।

मुंबई, 12 सितंबर (आईएएनएस)। अभिनेत्री नेहा धूपिया आगामी रियलिटी शो 'रोडीज रीबर्थ' के 20वें एडिशन में एक गैंग लीडर के तौर पर नजर आएंगी। अभिनेत्री ने बताया कि मां बनने के बाद उनकी जीवन में किस तरह के बदलाव आए हैं।

उन्होंने आईएएनएस के साथ बातचीत में कहा कि प्रोफेशनल लाइफ में हार-जीत से उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, लेकिन बच्चों की तबीयत बिगड़ने से वह घबरा जाती हैं। अभिनेत्री ने कहा, "मुझे लगता है कि कॉन्फिडेंश कंफर्ट से आता है फिर चाहे वह कपड़े पहनना हो या बात करना। मैं न उन विषयों पर बात नहीं करना चाहती, जिनमें कंफर्टेबल नहीं हूं और न ऐसे कपड़े पहनना चुनती हूं जिनमें मैं असहज महसूस करूं।"

नेहा धूपिया ने बताया कि मदरहुड ने उनके कॉन्फिडेंस को कैसे बदला है। उन्होंने कहा, "जब आप घबराहट की बात करते हैं, तो मुझे लगता है कि मां बनने के बाद मैं बहुत घबराने लगी हूं। जब बात बच्चों की आती है, तो मेरा कॉन्फिडेंस जीरो हो जाता है। भगवान न करे ऐसा हो, लेकिन कभी-कभी जब मेरे बच्चों को बुखार आता है या उनकी तबीयत खराब होती है, तो मैं बहुत ज्यादा घबरा जाती हूं।"

नेहा धूपिया ने बताया कि वे अपने पति की शुक्रगुजार हैं, जो उनकी गैरमौजूदगी में बच्चों का ख्याल रखते हैं। उन्होंने कहा, "भगवान का शुक्र है कि मेरी शादी ऐसे इंसान से हुई है, क्योंकि जब बच्चा बीमार होता है तो उसे बच्चे के साथ-साथ मुझे भी संभालना पड़ता है। मैं बहुत नर्वस हो जाती हूं।"

नेहा ने आगे कहा, "अजीब बात है कि इतने सालों में कोई भी चीज मुझे नर्वस नहीं कर पाई। मैं जीतने-हारने से नहीं डरती, सही या गलत साबित करने से नहीं डरती, किसी के सही-गलत कहने से भी नहीं डरती। इस तरह की चीजों ने मुझे कभी परेशान नहीं किया, क्योंकि मैं बस यही सोचती हूं कि पल में जियो, जिंदगी बहुत छोटी है, इसके बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। लेकिन बच्चों की बात आते ही मेरा सारा कॉन्फिडेंस खत्म हो जाता है। मैं बस यही सोचती रहती हूं कि मेरे बच्चे ठीक हों। अभी जब मैं इंटरव्यू दे रही हूं, तब भी मेरे दिमाग का 90 प्रतिशत हिस्सा बच्चों के बारे में ही सोच रहा है और सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा ही वह कॉन्फिडेंट इंसान है।"

--आईएएनएस

एनएस/एएस

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