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20 साल बाद फिर ब्राह्मण वोट बैंक पर नजर, क्या मायावती दोहरा पाएंगी 2007 वाला सियासी इतिहास?

20 साल बाद फिर ब्राह्मण वोट बैंक पर नजर, क्या मायावती दोहरा पाएंगी 2007 वाला सियासी इतिहास?

मायावती एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही हैं। साल 2007 में ब्राह्मण-दलित सामाजिक समीकरण के दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने वाली मायावती अब करीब 20 साल बाद उसी फार्मूले को दोहराने की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही हैं।

2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने ‘सर्वजन’ राजनीति का नारा दिया था। उस समय मायावती ने दलितों के साथ बड़ी संख्या में ब्राह्मण वोटरों को अपने पक्ष में जोड़ने में सफलता हासिल की थी। इसका नतीजा यह रहा कि BSP ने पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई और मायावती चौथी बार उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं।

अब बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच मायावती फिर से ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश कर रही हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में लगातार कमजोर हो रहे जनाधार को मजबूत करने के लिए BSP पुराने सोशल इंजीनियरिंग मॉडल पर भरोसा जता रही है।

सूत्रों के अनुसार पार्टी संगठन स्तर पर ब्राह्मण सम्मेलन, समाज के प्रभावशाली चेहरों से संपर्क और नए राजनीतिक संदेश तैयार करने पर काम कर रही है। BSP यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि पार्टी सभी वर्गों को साथ लेकर चलने वाली राजनीति में विश्वास रखती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि 2007 के मुकाबले अब उत्तर प्रदेश की राजनीति काफी बदल चुकी है। भाजपा, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी मुकाबला पहले से ज्यादा जटिल हो गया है। ऐसे में मायावती के सामने सबसे बड़ी चुनौती पुराने वोट बैंक को दोबारा मजबूत करना है।

हाल के वर्षों में BSP का प्रदर्शन लगातार कमजोर हुआ है। लोकसभा और विधानसभा चुनावों में पार्टी को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में माना जा रहा है कि ब्राह्मण वोटरों को फिर से जोड़ने की रणनीति BSP के लिए राजनीतिक तौर पर अहम साबित हो सकती है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि मायावती दलित-ब्राह्मण समीकरण को दोबारा मजबूत करने में सफल रहती हैं, तो उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया समीकरण देखने को मिल सकता है। हालांकि यह रणनीति कितनी सफल होगी, इसका जवाब आने वाले चुनावों में ही मिल पाएगा।

फिलहाल उत्तर प्रदेश की राजनीति में मायावती की यह नई सक्रियता चर्चा का विषय बनी हुई है और सभी दल BSP की अगली रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।

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