University Protest: प्रदर्शनों के चलते कई कैंपस में परीक्षाएं टलीं, सोशल मीडिया की सूचनाओं से बढ़ा तनाव
देश के कई विश्वविद्यालयों में अलग-अलग मुद्दों को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन का असर शैक्षणिक गतिविधियों और परीक्षा कार्यक्रमों पर पड़ा है। कुछ मामलों में छात्रों ने परीक्षा का बहिष्कार किया, जबकि कुछ विश्वविद्यालयों को सुरक्षा और कैंपस की स्थिति को देखते हुए परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं। हाल के मामलों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग ग्रुप के जरिए तेजी से फैलने वाली अपुष्ट सूचनाएं भी तनाव बढ़ाने का कारण बनी हैं।
LPU में प्रदर्शन के बाद परीक्षाएं स्थगित
पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) में एक छात्रा से जुड़े सोशल मीडिया दावों के बाद छात्रों का विरोध बढ़ गया। पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोशल मीडिया पर किए गए दावों को खारिज किया, लेकिन कैंपस में प्रदर्शन तेज हो गया। इस दौरान तोड़फोड़ और दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे जाम किए जाने की घटनाएं सामने आईं।
स्थिति को देखते हुए LPU ने 28 सितंबर से नियमित कक्षाएं 10 दिनों के लिए स्थगित कर दीं। इसके साथ ही मिड-टर्म परीक्षाओं को भी अगले आदेश तक टाल दिया गया।
चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया पोस्ट के बाद प्रदर्शन
LPU से एक दिन पहले चितकारा यूनिवर्सिटी में भी सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप ग्रुपों पर दो छात्रों के लापता होने या मौत से जुड़े दावे तेजी से फैलने लगे। कुछ पोस्ट में विश्वविद्यालय पर घटना छिपाने के आरोप भी लगाए गए। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र कैंपस में जुटे और जवाब की मांग करने लगे।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ टकराव, कैंपस में तोड़फोड़ और पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाने जैसी घटनाएं भी सामने आईं।
IIT Bombay में छात्र की मौत के बाद आंदोलन
आईआईटी बॉम्बे में मामला सोशल मीडिया अफवाहों से अलग था। यहां दूसरे वर्ष के छात्र साहिल की 18 सितंबर 2026 को मौत के बाद छात्रों ने संस्थान की जवाबदेही, छात्र कल्याण और शिकायत निवारण व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया।
साहिल के परिवार की ओर से संस्थान पर जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के आरोप भी लगाए गए। इन घटनाओं के बीच आईआईटी बॉम्बे ने 26 और 27 सितंबर को होने वाली मिड-सेमेस्टर परीक्षाओं को 10 और 11 अक्टूबर तक स्थगित कर दिया।
तेजपुर यूनिवर्सिटी में कुलपति के खिलाफ प्रदर्शन
असम की तेजपुर यूनिवर्सिटी में 2025 के अंत में छात्रों, शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों ने तत्कालीन कुलपति शंभू नाथ सिंह के खिलाफ प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने वित्तीय और अकादमिक अनियमितताओं के आरोप लगाए और कुलपति को हटाने की मांग की।
लंबे समय तक चले आंदोलन का असर विश्वविद्यालय की अकादमिक और प्रशासनिक गतिविधियों पर पड़ा। इसके बाद सेमेस्टर परीक्षाओं को भी स्थगित करना पड़ा था।
मणिपुर यूनिवर्सिटी में भी परीक्षाओं पर पड़ा असर
सितंबर 2024 में मणिपुर यूनिवर्सिटी में सुरक्षा बलों के साथ टकराव के बाद छात्र आंदोलन तेज हो गया था। उस समय राज्य में कर्फ्यू और इंटरनेट बंदी जैसी परिस्थितियां भी थीं। इसके बाद विश्वविद्यालय ने सभी यूजी और पीजी परीक्षाओं को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था।
दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ छात्रों का विरोध
दिसंबर 2024 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के लॉ छात्रों ने सिलेबस पूरा नहीं होने, फैकल्टी में बदलाव, कोर्स आवंटन में देरी और अचानक सिलेबस अपडेट किए जाने जैसे मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया था। इस विरोध के बीच लॉ की परीक्षाओं को स्थगित करने की बात सामने आई थी।
मैसूर यूनिवर्सिटी में फीस और शिक्षकों की कमी का मुद्दा
अक्टूबर 2024 में मैसूर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने परीक्षा टालने, फीस बढ़ाने और शिक्षकों की कमी को लेकर प्रदर्शन किया था। छात्रों का कहना था कि गेस्ट फैकल्टी की कमी के कारण उनका सिलेबस पूरा नहीं हो पाया और ऐसी स्थिति में परीक्षा आयोजित करना उचित नहीं है।
सोशल मीडिया बना नया चुनौतीपूर्ण पहलू
इन अलग-अलग घटनाओं में मुद्दे भले ही अलग रहे हों, लेकिन हालिया मामलों में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म की भूमिका प्रमुखता से सामने आई है। अपुष्ट या अस्पष्ट जानकारी कुछ ही समय में बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंच सकती है, जिससे कैंपस में तनाव की स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के लिए आधिकारिक जानकारी की पुष्टि करना महत्वपूर्ण हो जाता है।

