NEET-UPSC से भी ज्यादा कठिन मानी जाती हैं एशिया की ये परीक्षाएं, एग्जाम के दिन थम जाती हैं हवाई उड़ानें
भारत में UPSC और NEET जैसी परीक्षाओं को सबसे कठिन एग्जाम्स में गिना जाता है। लाखों छात्र सालों तक मेहनत कर इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एशिया में कुछ ऐसी परीक्षाएं भी हैं जिन्हें इनसे कहीं ज्यादा कठिन और दबावपूर्ण माना जाता है। इन परीक्षाओं का असर इतना बड़ा होता है कि परीक्षा के दिन पूरे देश की व्यवस्था तक बदल जाती है और कहीं-कहीं हवाई उड़ानों तक को रोक दिया जाता है।
एशियाई देशों में शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बेहद गंभीर माहौल देखा जाता है। यहां कई परीक्षाएं सिर्फ करियर ही नहीं, बल्कि छात्रों के पूरे भविष्य का फैसला करती हैं। यही कारण है कि इन एग्जाम्स को लेकर समाज और सरकार दोनों अत्यधिक संवेदनशील रहते हैं।
चीन की ‘गाओकाओ’ परीक्षा
एशिया की सबसे कठिन परीक्षाओं में सबसे पहले नाम आता है चीन की “Gaokao” परीक्षा का। यह परीक्षा चीन के छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी में प्रवेश का मुख्य माध्यम है। हर साल करोड़ों छात्र इसमें शामिल होते हैं और इसे जीवन बदलने वाली परीक्षा माना जाता है।
गाओकाओ का दबाव इतना ज्यादा होता है कि परीक्षा के दौरान कई शहरों में ट्रैफिक नियंत्रित किया जाता है, निर्माण कार्य रोक दिए जाते हैं और आसपास शोर कम रखने के लिए विशेष इंतजाम किए जाते हैं। छात्रों को शांत वातावरण मिल सके, इसके लिए प्रशासन अलर्ट मोड पर रहता है।
दक्षिण कोरिया की ‘सूनुंग’ परीक्षा
दक्षिण कोरिया की “Suneung” परीक्षा भी दुनिया की सबसे कठिन और तनावपूर्ण परीक्षाओं में गिनी जाती है। यह कॉलेज स्कॉलैस्टिक एबिलिटी टेस्ट (CSAT) है, जो छात्रों के भविष्य का बड़ा निर्धारक माना जाता है।
इस परीक्षा के दिन पूरे देश का माहौल बदल जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार परीक्षा के दौरान ट्रैफिक कम रखने के लिए दफ्तर देर से खुलते हैं और सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अंग्रेजी लिसनिंग टेस्ट के समय हवाई जहाजों की उड़ानें और लैंडिंग तक अस्थायी रूप से रोक दी जाती हैं ताकि किसी प्रकार का शोर छात्रों की एकाग्रता को प्रभावित न करे।
जापान की नेशनल सेंटर टेस्ट
जापान में यूनिवर्सिटी एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय परीक्षा भी बेहद कठिन मानी जाती है। यहां छात्रों पर अकादमिक प्रदर्शन का भारी दबाव होता है। परीक्षा में असफल होने पर छात्रों को अगले साल तक इंतजार करना पड़ सकता है, इसलिए इसे लेकर तनाव काफी अधिक रहता है।
भारत की UPSC और NEET भी कम नहीं
भारत की UPSC सिविल सेवा परीक्षा और NEET भी दुनिया की कठिन परीक्षाओं में शामिल हैं। UPSC में सफलता दर बेहद कम होती है, जबकि NEET में लाखों छात्र सीमित मेडिकल सीटों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। हालांकि एशिया के कुछ देशों में परीक्षा को लेकर सामाजिक और सरकारी स्तर पर जो माहौल बनाया जाता है, वह इसे और भी ज्यादा चुनौतीपूर्ण बना देता है।
क्यों इतनी कठिन मानी जाती हैं ये परीक्षाएं?
विशेषज्ञों के अनुसार इन परीक्षाओं की कठिनाई केवल सवालों के स्तर में नहीं, बल्कि मानसिक दबाव, सामाजिक अपेक्षाओं और सीमित अवसरों में भी छिपी होती है। कई देशों में इन एग्जाम्स को जीवन की दिशा तय करने वाला मोड़ माना जाता है, जिससे छात्रों पर अत्यधिक दबाव बनता है।
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाएं छात्रों की क्षमता जांचने का माध्यम जरूर हैं, लेकिन मानसिक स्वास्थ्य और संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। लगातार बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच कई देशों में अब परीक्षा प्रणाली को कम तनावपूर्ण बनाने पर भी चर्चा शुरू हो चुकी है।

