Samachar Nama
×

School Education Update: अब 9वीं क्लास के बच्चे सीखेंगे यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के फंडे, NCERT ने कोर्स में किया बड़ा बदलाव

School Education Update: अब 9वीं क्लास के बच्चे सीखेंगे यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स के फंडे, NCERT ने कोर्स में किया बड़ा बदलाव

स्कूली शिक्षा में बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ रोजमर्रा की जिंदगी में काम आने वाली चीजें सिखाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में NCERT ने कक्षा 9 की सोशल साइंस की नई किताब के भाग-2 में अर्थशास्त्र (Economics) से जुड़े दो नए अध्याय शामिल किए हैं। अब छात्र केवल अर्थव्यवस्था के पारंपरिक सिद्धांत ही नहीं पढ़ेंगे, बल्कि कम उम्र से ही पैसों का प्रबंधन, निवेश, टैक्स और बिजनेस शुरू करने जैसी जरूरी बातें भी सीख सकेंगे।

इस बदलाव की जानकारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और अर्थशास्त्री संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए दी। उनके मुताबिक, नई किताबों में उद्यमिता, नवाचार और जोखिम उठाने की क्षमता को सकारात्मक रूप में समझाया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भविष्य की आर्थिक चुनौतियों और वास्तविक जीवन के फैसलों के लिए तैयार करना है।

अब स्कूल में ही सीखेंगे पैसों का प्रबंधन

नई किताब में पर्सनल फाइनेंस पर आधारित एक अध्याय जोड़ा गया है। इसके जरिए विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि कमाई, बचत और निवेश के बीच संतुलन कैसे बनाया जाता है। छात्र समझेंगे कि पैसों का सही इस्तेमाल करना क्यों जरूरी है और भविष्य की जरूरतों के लिए बचत कैसे की जा सकती है।

इस अध्याय में कई महत्वपूर्ण वित्तीय विषय शामिल किए गए हैं:

  • फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और सरकारी बचत योजनाएं

  • म्यूचुअल फंड और SIP निवेश

  • शेयर बाजार और बॉन्ड

  • कम और ज्यादा जोखिम वाले निवेश

  • महंगाई यानी Inflation का असर

  • कंपाउंडिंग के जरिए निवेश पर मिलने वाला रिटर्न

छात्रों को यह भी समझाया जाएगा कि कम जोखिम वाले निवेश में आमतौर पर रिटर्न की संभावना कम होती है, जबकि ज्यादा जोखिम वाले निवेश में अधिक रिटर्न की संभावना के साथ नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है।

EMI, क्रेडिट कार्ड और इनकम टैक्स की भी मिलेगी जानकारी

पर्सनल फाइनेंस के नए अध्याय में केवल बचत और निवेश ही नहीं, बल्कि कर्ज और टैक्स से जुड़ी बुनियादी जानकारी भी दी जाएगी। इसमें विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि बैंक से लोन लेने पर EMI कैसे काम करती है और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।इसके अलावा डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स के बीच अंतर भी समझाया जाएगा। नई टैक्स व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत आयकर स्लैब और टैक्स देनदारी की गणना के उदाहरणों के जरिए बच्चों को टैक्स सिस्टम की बुनियादी समझ देने की कोशिश की गई है।

नींबू पानी का स्टॉल लगाकर समझेंगे बिजनेस का गणित

NCERT की नई किताब में दूसरा अध्याय एंटरप्रेन्योरशिप यानी उद्यमिता पर आधारित है। इसमें छात्रों को बताया जाएगा कि किसी बिजनेस आइडिया को वास्तविक कारोबार में कैसे बदला जा सकता है और एक स्टार्टअप किस तरह काम करता है।इस अध्याय में स्कूल मेले का उदाहरण दिया गया है। विद्यार्थियों को कल्पना करने के लिए कहा जाता है कि वे स्कूल में आयोजित यंग एंटरप्रेन्योर्स चैलेंज के तहत नींबू पानी का स्टॉल लगा रहे हैं। इसके बाद उन्हें बताया जाता है कि बिजनेस शुरू करने के लिए किन चीजों की जरूरत होगी, सामान खरीदने में कितनी लागत आएगी, बिक्री की कीमत कैसे तय होगी और आखिर में कितना मुनाफा बचेगा।इसके अलावा बेकरी के उदाहरण के जरिए भी छात्रों को लागत, बिक्री, मुनाफे और नुकसान का हिसाब समझाया जाएगा। इससे उन्हें किताबों में पढ़े गए आर्थिक सिद्धांतों को वास्तविक जीवन से जोड़ने में मदद मिलेगी।

बिजनेस और स्टार्टअप को लेकर बदली सोच

अर्थशास्त्री संजीव सान्याल के अनुसार, पुरानी पाठ्य पुस्तकों में व्यावसायिक गतिविधियों को समझाते समय जमाखोरी और कालाबाजारी जैसे नकारात्मक पहलुओं पर अधिक जोर दिया जाता था। इसके मुकाबले नई किताबों में कारोबार, नवाचार और जोखिम उठाने की क्षमता को अर्थव्यवस्था तथा रोजगार सृजन के महत्वपूर्ण साधनों के रूप में पेश किया गया है।इस बदलाव का मकसद विद्यार्थियों में उद्यमिता के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में नौकरी तलाशने के साथ-साथ अपना कारोबार शुरू करने के विकल्प को भी समझ सकें।

नई शिक्षा नीति के तहत हुआ बदलाव

NCERT के पाठ्यक्रम में यह बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 की दिशा के अनुरूप बताया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक व्यावहारिक बनाना और विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ जरूरी जीवन कौशल सिखाना है।

भारत में स्टार्टअप, छोटे कारोबार, MSME और निवेश के क्षेत्र में बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वित्तीय जागरूकता का महत्व भी बढ़ा है। ऐसे में कक्षा 9 से ही बच्चों को बचत, निवेश, टैक्स और बिजनेस की बुनियादी जानकारी देना उनके भविष्य के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।कुल मिलाकर, NCERT की नई किताबों में शामिल ये दोनों अध्याय विद्यार्थियों को कम उम्र से ही आर्थिक रूप से जागरूक और उद्यमशील बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।

Share this story

Tags