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Odisha School Books: 175 करोड़ की किताबों में मिलीं 1,741 गलतियां, जांच में सामने आई प्रिंटिंग और रिव्यू की खामियां
 

Odisha School Books: 175 करोड़ की किताबों में मिलीं 1,741 गलतियां, जांच में सामने आई प्रिंटिंग और रिव्यू की खामियां

ओडिशा के सरकारी स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई जाने वाली पाठ्यपुस्तकों को लेकर विधानसभा में चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। राज्य सरकार के अनुसार, इन किताबों की जांच के दौरान कुल 1,741 गलतियां पाई गईं। इन पाठ्यपुस्तकों की छपाई पर सरकार ने करीब 175 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

स्कूल एवं जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड ने विधानसभा में बताया कि सबसे अधिक गलतियां ग्रामर, टाइपिंग और स्पेलिंग से संबंधित थीं। कुल त्रुटियों में से 1,075 गलतियां इसी श्रेणी की थीं। इसके अलावा पांच गलतियों को तथ्यात्मक या वैचारिक त्रुटि के रूप में दर्ज किया गया, जबकि किताबों में सुधार के लिए 661 सुझाव भी प्राप्त हुए।
कक्षा 8 की साइंस बुक में सबसे ज्यादा त्रुटियां
जांच की गई पाठ्यपुस्तकों में सबसे ज्यादा गलतियां कक्षा 8 की साइंस की किताब में मिलीं। इसमें कुल 294 त्रुटियां दर्ज की गईं।
इसके बाद कक्षा 7 की उर्दू किताब में 121, कक्षा 8 की संस्कृत किताब में 114, कक्षा 6 की सोशल साइंस किताब में 98 और कक्षा 7 की संस्कृत किताब में 92 गलतियां सामने आईं।

तीन चरणों में बढ़ी गलतियों की संख्या
पाठ्यपुस्तकों में त्रुटियों का मामला सामने आने पर शुरुआत में 1,678 गलतियां बताई गई थीं। आगे की जांच में यह संख्या 1,731 तक पहुंची और दोबारा जांच के बाद कुल त्रुटियों की संख्या 1,741 हो गई।
जांच रिपोर्ट में किताब तैयार करने की प्रक्रिया को लेकर भी कई कमियां सामने आईं। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ लोगों को एक से अधिक जिम्मेदारियां दी गई थीं। यानी किसी व्यक्ति को लेखक के साथ-साथ समीक्षक या प्रूफरीडर की भूमिका भी दी गई थी।
फाइनल ड्राफ्ट की जांच के लिए मिला सिर्फ एक दिन
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पाठ्यपुस्तकों के फाइनल ड्राफ्ट की समीक्षा के लिए विषय विशेषज्ञों को केवल एक दिन का समय दिया गया था। प्रिंटर से प्राप्त प्रूफ और अंतिम रूप से छपी किताब के प्रत्येक पेज की पर्याप्त जांच भी नहीं हो सकी।
रिपोर्ट में किताबों की फील्ड टेस्टिंग नहीं किए जाने का भी उल्लेख किया गया। कम समय में प्रक्रिया पूरी कर किताबों को नए शैक्षणिक सत्र के लिए जारी कर दिया गया। बाद में छात्रों और शिक्षकों तक किताबें पहुंचने के बाद कई त्रुटियां सामने आईं।
अधिकारियों के खिलाफ हुई कार्रवाई
गलतियों का मामला सामने आने के बाद सरकार ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की। सरकार के मुताबिक, तत्कालीन डायरेक्टर और तीन असिस्टेंट डायरेक्टर्स को निलंबित किया गया, जबकि छह अन्य असिस्टेंट डायरेक्टर्स के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई।
सरकार अब पाठ्यपुस्तकों की जांच व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी कर रही है। इसके तहत विषय विशेषज्ञों से तथ्यों की जांच और भाषा विशेषज्ञों से ग्रामर तथा भाषा संबंधी त्रुटियों की समीक्षा कराने की व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा।

किताबों में तथ्यात्मक गलतियां भी मिलीं
जांच में कुछ ऐसी त्रुटियां भी सामने आईं जो केवल स्पेलिंग या टाइपिंग तक सीमित नहीं थीं। इनमें ओडिशा विधानसभा की तस्वीर, नियमगिरि पहाड़ियों की लोकेशन और कोणार्क सूर्य मंदिर की पहचान से संबंधित गलतियां शामिल थीं।

इन त्रुटियों को सुधारने के लिए स्कूलों को आवश्यक करेक्शन की जानकारी दी गई है। साथ ही संशोधित पाठ्यपुस्तक तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। करीब 175 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इन किताबों में बड़ी संख्या में गलतियां सामने आने के बाद अब सरकार का फोकस संशोधित पुस्तकों और बेहतर समीक्षा व्यवस्था पर है।
 

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