Samachar Nama
×

"सिर्फ स्कूल के भरोसे नहीं निकलेगा NEET-JEE!" एक्सपर्ट कमेटी ने स्कूली पढ़ाई पर उठाए सवाल

"सिर्फ स्कूल के भरोसे नहीं निकलेगा NEET-JEE!" एक्सपर्ट कमेटी ने स्कूली पढ़ाई पर उठाए सवाल

12वीं के बाद इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर सरकार की एक्सपर्ट कमेटी ने एक अहम बात सामने रखी है। कमेटी की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक देश के स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले सिलेबस और इन प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न के बीच काफी अंतर है। यही वजह है कि स्कूली शिक्षा के बावजूद छात्रों को JEE और NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग का सहारा लेना पड़ता है।

रिपोर्ट में इस अंतर को कम करने के लिए स्कूली शिक्षा में कई बदलाव करने की जरूरत बताई गई है। कमेटी का मानना है कि अगर छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी बुनियादी तैयारी स्कूल में ही मिल जाए, तो कोचिंग पर उनकी निर्भरता कम की जा सकती है।

स्कूल और JEE-NEET की पढ़ाई में क्या है अंतर?

रिपोर्ट के मुताबिक स्कूलों में पढ़ाई का मुख्य फोकस बोर्ड परीक्षाओं और सैद्धांतिक ज्ञान पर रहता है। वहीं JEE और NEET जैसी परीक्षाओं में छात्रों की कॉन्सेप्ट समझ, विश्लेषण करने की क्षमता और समस्या का समाधान निकालने की स्किल को परखा जाता है।

स्कूल स्तर पर इन क्षमताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिए जाने के कारण छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग से कोचिंग करनी पड़ती है। यही वजह है कि कई छात्र 9वीं या 10वीं कक्षा से ही कोचिंग की तैयारी शुरू कर देते हैं। इससे बच्चों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ने के साथ परिवारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।

NCERT और राज्य बोर्ड के सिलेबस में बदलाव का सुझाव

सरकार की एक्सपर्ट कमेटी ने सुझाव दिया है कि NCERT और अलग-अलग राज्य बोर्डों के पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया जाए, जिससे छात्रों को स्कूल में ही प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए जरूरी बेसिक कॉन्सेप्ट और समस्या समाधान की समझ मिल सके।

कमेटी का मानना है कि अगर स्कूल की पढ़ाई को प्रतियोगी परीक्षाओं की जरूरतों के अनुरूप बेहतर बनाया जाता है, तो छात्रों को हर चीज के लिए कोचिंग संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे बच्चों का मानसिक दबाव और अभिभावकों का आर्थिक बोझ भी कम हो सकता है।

टीचर्स को भी मिले एडवांस ट्रेनिंग

रिपोर्ट में स्कूल शिक्षकों की ट्रेनिंग पर भी जोर दिया गया है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि शिक्षकों को ऐसे एडवांस टीचिंग तरीकों की ट्रेनिंग दी जाए, जिनसे वे छात्रों को कॉन्सेप्ट आधारित और प्रॉब्लम सॉल्विंग तरीके से पढ़ा सकें।

इसके अलावा शिक्षकों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के पैटर्न और सवालों की प्रकृति की भी बेहतर समझ दी जानी चाहिए। इससे स्कूल में पढ़ाई का तरीका ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकेगा।

छात्रों की मेंटल हेल्थ पर भी जताई चिंता

कमेटी ने कोटा समेत देश के कई कोचिंग हब्स में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर भी चिंता जाहिर की है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान लगातार पढ़ाई, बेहतर प्रदर्शन का दबाव और असफलता का डर कई छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि सिर्फ कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने से समस्या का पूरा समाधान नहीं होगा। जब तक स्कूली शिक्षा को मजबूत नहीं किया जाता और छात्रों को बेहतर तरीके से प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार नहीं किया जाता, तब तक कोचिंग पर निर्भरता कम करना मुश्किल रहेगा।

Share this story

Tags