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NCERT Class 9 Book: नई सोशल साइंस किताब में सेंगोल का जिक्र, चोल काल से 1947 तक का इतिहास बताया
 

NCERT Class 9 Book: नई सोशल साइंस किताब में सेंगोल का जिक्र, चोल काल से 1947 तक का इतिहास बताया

एनसीईआरटी की कक्षा 9वीं की नई सोशल साइंस की किताब में सेंगोल को शासन और सुशासन से जुड़े सांस्कृतिक प्रतीक के तौर पर शामिल किया गया है। किताब में सेंगोल के इतिहास को चोल राजवंश के दौर से जोड़ते हुए शासन व्यवस्था में इसके महत्व को समझाया गया है। इसका उल्लेख उस अध्याय में किया गया है, जिसमें शासन, सार्वजनिक नीतियों और सुशासन के सिद्धांतों पर चर्चा की गई है।


कक्षा 9 की इस किताब का नाम Understanding Society-India and Beyond, Social Science Textbook for Grade 9, Part 2 है। यह किताब शैक्षणिक सत्र शुरू होने के करीब छह महीने बाद जारी की गई है। इससे पहले इसका पहला भाग जून में जारी किया गया था।
2023 में नए संसद भवन में स्थापित किया गया सेंगोल
किताब में बताया गया है कि सेंगोल को साल 2023 में नए संसद भवन में स्थापित किया गया। 28 मई 2023 को नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लोकसभा अध्यक्ष के आसन के पास कांच के केस में स्थापित किया था।
एनसीईआरटी की किताब सेंगोल को शासन और अच्छे प्रशासन से जुड़े प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती है। इसमें बताया गया है कि धर्मसम्मत शासन के प्रतीक के तौर पर सेंगोल के इस्तेमाल की परंपरा 1000 साल से अधिक पुरानी मानी जाती है और इसका संबंध चोल काल से जोड़ा जाता है।
1947 के सत्ता हस्तांतरण से भी जोड़ा गया
किताब में सेंगोल का संबंध भारत की आजादी और 1947 में सत्ता हस्तांतरण से भी बताया गया है। इसमें उल्लेख है कि 15 अगस्त 1947 की आधी रात स्वतंत्रता के अवसर पर तमिलनाडु की आदीनम परंपरा से जुड़े संतों की ओर से तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सेंगोल दिया गया था।
2023 में नए संसद भवन के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सेंगोल को 1947 में सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक बताया था। उनके अनुसार यह प्रक्रिया सी. राजगोपालाचारी और आदीनम परंपरा के मार्गदर्शन में पूरी हुई थी।
हालांकि, इस दावे को लेकर कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए हैं। पार्टी का कहना रहा है कि लॉर्ड माउंटबेटन, सी. राजगोपालाचारी और जवाहरलाल नेहरू द्वारा सेंगोल को ब्रिटिश शासन से भारत को सत्ता हस्तांतरण का आधिकारिक प्रतीक बताए जाने का कोई दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध नहीं है।


तमिल परंपरा और शासन व्यवस्था से जुड़ा प्रतीक
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार सेंगोल प्राचीन तमिल सभ्यता की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा राजदंड है। तमिल राजाओं के राज्याभिषेक से संबंधित परंपराओं में इसका इस्तेमाल किया जाता था। मंत्रालय इसे केवल औपचारिक वस्तु के बजाय शासन की नैतिक जिम्मेदारियों से जुड़े प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है।
मंत्रालय के अनुसार 1947 में स्वतंत्रता के समय सेंगोल की परंपरा को फिर सामने लाया गया और एक सेंगोल जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था। इसे वुम्मिडी बंगारू चेट्टी ने तैयार किया था और तिरुवावडुतुरै आदीनम के संतों ने धार्मिक रूप से प्रतिष्ठित किया था।
सुशासन के सिद्धांतों पर भी जोर
कक्षा 9 की सोशल साइंस किताब के शासन व्यवस्था से जुड़े अध्याय में सेंगोल के अलावा सत्यमेव जयते और सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य 'यतो धर्मस्ततो जयः' का भी उल्लेख किया गया है।
किताब इन प्रतीकों को शासन व्यवस्था से जुड़े मूल्यों के संदर्भ में समझाती है। इसी अध्याय में बरगद के पेड़ का उदाहरण देकर सुशासन के विभिन्न सिद्धांतों को समझाया गया है। इनमें जनभागीदारी, कानून का शासन, जवाबदेही, प्रभावशीलता, समावेशिता, उत्तरदायित्व और पारदर्शिता जैसे सिद्धांत शामिल हैं।
 

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