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Jammu Kashmir Literacy: जम्मू-कश्मीर ने रचा नया इतिहास, 98.43% साक्षरता के साथ बना पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश
 

Jammu Kashmir Literacy: जम्मू-कश्मीर ने रचा नया इतिहास, 98.43% साक्षरता के साथ बना पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश

जम्मू-कश्मीर ने शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार के उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर को अब पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया है। यहां साक्षरता दर बढ़कर 98.43 प्रतिशत हो गई है। इस उपलब्धि को केंद्र शासित प्रदेश में शिक्षा के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

जम्मू-कश्मीर की शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए शिक्षकों, शिक्षा स्वयंसेवकों, अधिकारियों और अभियान से जुड़े विद्यार्थियों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि दूरदराज के पहाड़ी इलाकों से लेकर जम्मू के मैदानी क्षेत्रों तक शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार काम किया गया।

तीन साल में 7.58 लाख लोगों की हुई पहचान
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 2023 से 2026 के बीच जम्मू-कश्मीर में करीब 7.58 लाख गैर-साक्षर लोगों की पहचान की गई। इसके लिए घर-घर सर्वे के साथ सामुदायिक जागरूकता अभियान और विभिन्न आउटरीच गतिविधियां चलाई गईं।
अभियान का फोकस उन लोगों तक पहुंचना था, जो किसी कारण से औपचारिक शिक्षा से दूर रह गए थे। इन लोगों को बुनियादी पढ़ने-लिखने के साथ जरूरी संख्यात्मक ज्ञान हासिल करने के अवसर दिए गए।

5.53 लाख लोगों ने पास किया FLNAT
अधिकारियों के अनुसार इस अवधि में करीब 5.84 लाख शिक्षार्थियों ने फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमैरिक असेसमेंट टेस्ट यानी FLNAT की तैयारी की। इनमें से 5.53 लाख शिक्षार्थियों ने परीक्षा सफलतापूर्वक पास की।

शिक्षार्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए जरूरी सहायता उपलब्ध कराई गई और उन्हें मूल्यांकन प्रक्रिया में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
2025-26 में दो बार हुआ FLNAT
शिक्षा विभाग के प्रयासों को देखते हुए वर्ष 2025-26 में FLNAT का आयोजन दो बार किया गया। इस दौरान कुल 3,16,883 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की।

अधिकारियों के मुताबिक, वयस्कों को साक्षर बनाने के अभियान में शिक्षा विभाग के कर्मचारियों, स्वयंसेवकों और स्थानीय स्तर पर जुड़े लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
क्या है उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम?
उल्लास यानी Understanding of Lifelong Learning for All in Society पहल का उद्देश्य उन वयस्कों को बुनियादी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो किसी वजह से स्कूली शिक्षा हासिल नहीं कर पाए।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप चलाया जा रहा है। इसके तहत सिर्फ पढ़ना-लिखना सिखाने पर ही जोर नहीं दिया जाता, बल्कि लोगों को बुनियादी संख्यात्मक ज्ञान और रोजमर्रा की जिंदगी में उपयोगी सीखने के अवसर भी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है।
शिक्षा मंत्री ने बताया नई शुरुआत

शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने जम्मू-कश्मीर के पूर्ण साक्षर केंद्र शासित प्रदेश बनने को शिक्षा की यात्रा का अंत नहीं बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत बताया।
उन्होंने कहा कि साक्षरता को बनाए रखना और आगे इसे मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है। उनके मुताबिक शिक्षा समाज में शांति, प्रगति, सम्मान, समानता और समृद्धि का आधार बन सकती है।

उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय किसी एक व्यक्ति या विभाग को देने के बजाय इसे पूरे जम्मू-कश्मीर की सामूहिक जीत बताया। साथ ही इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महत्वपूर्ण विरासत के रूप में पेश किया।

आगे की चुनौती उपलब्धि को बनाए रखना
98.43 प्रतिशत साक्षरता दर तक पहुंचना जम्मू-कश्मीर के लिए बड़ा पड़ाव है, लेकिन अब चुनौती इस उपलब्धि को लंबे समय तक बनाए रखने की होगी। इसके लिए वयस्क शिक्षा, बच्चों की स्कूली शिक्षा और दूरदराज के क्षेत्रों में शैक्षणिक सुविधाओं पर लगातार ध्यान देना जरूरी होगा।
जम्मू-कश्मीर की यह उपलब्धि बताती है कि सरकारी योजनाओं के साथ स्थानीय समुदाय, शिक्षक और स्वयंसेवक मिलकर काम करें तो शिक्षा की पहुंच उन लोगों तक भी बढ़ाई जा सकती है, जो लंबे समय से औपचारिक शिक्षा व्यवस्था से बाहर रहे हैं।
 

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