पढ़ाई छोड़कर मुफ्त में की सीवर सफाई, जानिए कैसे कपिल बने हर महीने ₹35,000 कमाने वाले सफल व्यक्ति
आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए सीमित शिक्षा और अस्थिर रोजगार अक्सर आगे बढ़ने के रास्ते में बड़ी बाधा बन जाते हैं। ऐसे में समय पर मिलने वाली आर्थिक मदद और मशीनी उपकरण न सिर्फ रोजगार के बेहतर अवसर पैदा कर सकते हैं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका का रास्ता भी खोल सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के मुरादनगर स्थित हुसैनपुर गांव के रहने वाले 25 वर्षीय कपिल इसकी एक मिसाल हैं। 'नमस्ते-स्वच्छता उद्यमी योजना' के तहत मिली सहायता की बदौलत कपिल ने अपने पिता के साथ बिना वेतन के सहायक के रूप में काम करने से लेकर खुद का स्वच्छता व्यवसाय शुरू करने तक का सफर तय किया है।
12वीं के बाद छोड़नी पड़ी पढ़ाई
कपिल अनुसूचित जाति के खटीक समुदाय से आते हैं और उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। परिवार की आय मुख्य रूप से स्वच्छता से जुड़े पारंपरिक काम पर निर्भर रही है। आर्थिक परेशानियों के कारण कपिल 12वीं कक्षा के बाद आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख सके।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने पिता के साथ सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम शुरू कर दिया। काम के दौरान उन्होंने सफाई सेवाओं से जुड़े कई व्यावहारिक कौशल सीखे, लेकिन इस मेहनत के बावजूद उन्हें कोई तय मासिक वेतन नहीं मिलता था।
परिवार की जिम्मेदारी भी थी
परिवार के सबसे बड़े बेटे होने के कारण कपिल पर कम उम्र से ही कई जिम्मेदारियां आ गई थीं। वह अपने माता-पिता के साथ चार बहनों और तीन भाइयों की मदद भी करते थे। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण परिवार के पास पारंपरिक स्वच्छता कार्य के अलावा आय का कोई मजबूत जरिया नहीं था।
आर्थिक तंगी, सीमित शिक्षा, अस्थिर रोजगार और स्वच्छता कार्य से जुड़ा सामाजिक कलंक कपिल की तरक्की में बड़ी बाधाएं थे। इसके बावजूद उन्होंने आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने का लक्ष्य नहीं छोड़ा।
उनका सपना था कि वह गाद और कीचड़ निकालने वाली मशीन से लैस वाहन खरीदकर अपना खुद का व्यवसाय शुरू करें। वह सुरक्षित और बेहतर तरीके से स्वच्छता सेवाएं देने के साथ-साथ एक स्थिर आय हासिल करना चाहते थे।
नमस्ते योजना से मिली आर्थिक मदद
कपिल को वर्ष 2023 में 'नमस्ते' योजना के तहत लागू 'स्वच्छता उद्यमी योजना' के माध्यम से सक्शन मशीन से लैस ट्रैक्टर खरीदने के लिए वित्तीय सहायता मिली।
कुल 10,70,400 रुपये की परियोजना लागत में उन्हें 6,77,800 रुपये का ऋण और 3,92,600 रुपये की पूंजीगत सब्सिडी मिली। इस आर्थिक सहायता के बाद कपिल ने अपना मशीनीकृत स्वच्छता सेवा व्यवसाय शुरू किया।
आज वह ट्रैक्टर और सक्शन मशीन की मदद से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई का काम स्वतंत्र रूप से करते हैं। मशीनी उपकरणों ने न केवल उनके काम को आसान और सुरक्षित बनाया, बल्कि उनकी आय और आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी की है।
अब हर महीने 30 से 35 हजार रुपये की कमाई
सहायता मिलने से पहले कपिल अपने पिता के साथ अवैतनिक सहायक के तौर पर काम करते थे और उनकी कोई निश्चित मासिक आय नहीं थी। अब वह मशीनीकृत स्वच्छता सेवाओं से हर महीने करीब 30,000 से 35,000 रुपये कमाते हैं।
वह अपनी आय से घर के खर्च पूरे करने के साथ-साथ 14,517 रुपये की मासिक ऋण किस्त भी चुकाते हैं। इसके बावजूद उनकी आय इतनी है कि वह नियमित बचत करने और परिवार को पहले से ज्यादा आर्थिक सुरक्षा देने में सक्षम हैं।
अवैतनिक सहायक से बने स्वच्छता उद्यमी
'नमस्ते-स्वच्छता उद्यमी योजना' ने कपिल के वर्षों के व्यावहारिक अनुभव को एक स्थायी स्वरोजगार में बदलने का मौका दिया। आर्थिक सहायता और मशीनी उपकरणों की मदद से उन्होंने अस्थिर और कठिन श्रम वाले काम से आगे बढ़कर सुरक्षित और स्वतंत्र आजीविका की दिशा में कदम बढ़ाया।
कपिल की कहानी बताती है कि सही समय पर मिलने वाली वित्तीय सहायता, तकनीक और मशीनीकरण किस तरह स्वच्छता क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार, सम्मान और आर्थिक आत्मनिर्भरता के नए अवसर पैदा कर सकते हैं। आज वह न सिर्फ अपना कारोबार चला रहे हैं, बल्कि अपने परिवार के लिए बेहतर और सुरक्षित भविष्य तैयार करने की दिशा में भी आगे बढ़ रहे हैं।

