इलाज से लेकर प्रशासन तक! जब इन 5 डॉक्टरों ने MBBS की डिग्री के साथ क्रैक कर दी देश की सबसे कठिन परीक्षा
देश में लाखों युवाओं का सपना डॉक्टर बनना होता है. इसके लिए छात्र सालों तक मेहनत करते हैं, मेडिकल की कठिन पढ़ाई पूरी करते हैं और फिर एक सम्मानजनक और सुरक्षित करियर की ओर बढ़ते हैं. लेकिन कुछ ऐसे भी युवा हैं, जिन्होंने डॉक्टर बनने के बाद अपना रास्ता बदल लिया.
इन लोगों ने स्टेथोस्कोप और मेडिकल करियर को पीछे छोड़कर देश की सबसे कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल UPSC की तैयारी शुरू की. किसी ने नौकरी के साथ पढ़ाई की, तो किसी को लगातार कई असफलताओं का सामना करना पड़ा. लेकिन आखिरकार इन डॉक्टरों ने IAS और IPS बनकर अपनी अलग पहचान बनाई.
आइए जानते हैं ऐसे ही 5 डॉक्टरों की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने मेडिकल प्रोफेशन से सिविल सर्विसेज की ओर कदम बढ़ाया.
डॉ. अनुज अग्निहोत्री: MBBS के बाद UPSC में हासिल की AIR-1
राजस्थान के रावतभाटा के रहने वाले डॉ. अनुज अग्निहोत्री ने मेडिकल की पढ़ाई के बाद UPSC की राह चुनी. उन्होंने AIIMS जोधपुर से MBBS की पढ़ाई पूरी की.
डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही उनके मन में सिविल सर्विस में जाने का लक्ष्य बन गया था. उन्होंने UPSC की तैयारी शुरू की और परीक्षा पास करने के बाद दिल्ली में SDM के तौर पर काम भी किया.
हालांकि, उनका लक्ष्य सिर्फ सिविल सेवा में चयन तक सीमित नहीं था. उन्होंने अपनी कमियों को पहचाना और दोबारा तैयारी में जुट गए. आखिरकार अपने तीसरे प्रयास में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऑल इंडिया रैंक-1 हासिल की.
उनकी कहानी बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो तो एक सफल करियर को छोड़कर भी नई दिशा में शुरुआत की जा सकती है.
डॉ. रीतिका आइमा: कोरोना ड्यूटी ने दिखाया प्रशासन का रास्ता
उत्तराखंड की डॉ. रीतिका आइमा की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है. हल्द्वानी से MBBS करने के बाद उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान एक सरकारी हेल्थ सेंटर में काम किया.
कोरोना काल में काम करते हुए उन्होंने महसूस किया कि एक डॉक्टर के तौर पर वह एक समय में सीमित संख्या में मरीजों की मदद कर सकती हैं. लेकिन अगर स्वास्थ्य व्यवस्था को बड़े स्तर पर बेहतर बनाना है, तो प्रशासनिक व्यवस्था में रहकर काम करना ज्यादा प्रभावी हो सकता है.
यही विचार उन्हें UPSC की तैयारी की ओर ले गया.
पहले प्रयास में उन्होंने 186वीं रैंक हासिल की और IPS के लिए चयनित हुईं. हालांकि, उनका लक्ष्य IAS बनना था. उन्होंने नौकरी के साथ अपनी तैयारी जारी रखी और अगले प्रयास में 33वीं रैंक हासिल करके IAS बनने का सपना पूरा किया.
वह युवाओं को यह सलाह भी देती हैं कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान हमेशा एक मजबूत प्लान-B तैयार रखना चाहिए.
डॉ. राजदीप सिंह खैरा: 4 असफलताओं के बाद बने IAS
पंजाब के पटियाला से MBBS करने वाले डॉ. राजदीप सिंह खैरा की कहानी असफलता के बाद हार न मानने की मिसाल है.
MBBS के बाद उन्होंने मेडिकल ऑफिसर के तौर पर काम किया, लेकिन उनके मन में IAS बनने का सपना था. उन्होंने नौकरी छोड़कर UPSC की तैयारी शुरू कर दी.
शुरुआती दौर में उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा. वह चार प्रयासों में सफल नहीं हो सके. इसके बावजूद उन्होंने तैयारी नहीं छोड़ी.
पांचवें प्रयास में उन्होंने प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा पास कर ली. लेकिन इंटरव्यू से ठीक पहले उनके पिता का निधन हो गया. यह उनके जीवन का बेहद कठिन दौर था. इसके बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और इंटरव्यू में शामिल हुए.
आखिरकार उन्हें 495वीं रैंक मिली और वह IAS अधिकारी बने. उनकी कहानी बताती है कि मुश्किल हालात भी मजबूत इरादों वाले व्यक्ति को अपने लक्ष्य से दूर नहीं कर सकते.
डॉ. अंकुर लाठर: AIIMS से MBBS के बाद बनीं IAS
हरियाणा के राजगढ़ गांव की डॉ. अंकुर लाठर बचपन से ही पढ़ाई में होशियार थीं. उनके पिता पशु चिकित्सक थे और पढ़ाई के प्रति उनका रुझान शुरू से ही मजबूत रहा.
उन्होंने दिल्ली के AIIMS से MBBS की पढ़ाई पूरी की. मेडिकल की डिग्री के बाद उनके पास एक अच्छा करियर बनाने के सभी अवसर मौजूद थे. इसके बावजूद उन्होंने सिविल सर्विस में जाने का फैसला किया.
UPSC के पहले प्रयास में उन्हें सफलता नहीं मिली. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी तैयारी जारी रखी.
मेहनत के दम पर उन्होंने 2016 में UPSC में 77वीं रैंक हासिल की और IAS अधिकारी बनीं. इसके बाद उन्होंने प्रशासनिक सेवा में अपनी जिम्मेदारियां संभालीं.
उनकी कहानी उन युवाओं के लिए खास प्रेरणा है, जो पहली असफलता के बाद अपनी तैयारी छोड़ने का मन बना लेते हैं.
डॉ. अनिल कुमार: बचपन की असफलता से UPSC तक का सफर
राजस्थान के झुंझुनू के रहने वाले डॉ. अनिल कुमार के जीवन में असफलता बहुत पहले ही आ गई थी. बचपन में वह पांचवीं कक्षा के एक प्रवेश परीक्षा में असफल हो गए थे.
लेकिन इस असफलता ने उन्हें तोड़ने के बजाय और मेहनत करने के लिए प्रेरित किया. इसके बाद उन्होंने पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन किया और आगे चलकर जोधपुर से MBBS की पढ़ाई पूरी की.
MBBS के बाद उन्होंने दिल्ली के बड़े अस्पतालों में डॉक्टर के तौर पर काम किया. इसी दौरान उनके मन में UPSC की तैयारी करने का विचार आया.
उनकी मेहनत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने UPSC की परीक्षा में कई बार सफलता हासिल की. साल 2016 में उन्हें IPS सेवा मिली, जो उनका पसंदीदा विकल्प था.
डॉक्टर से अफसर बनने की इन कहानियों से क्या सीख मिलती है?
इन पांचों डॉक्टरों की कहानियां एक बात साफ करती हैं कि करियर का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता. डॉक्टर बनने के बाद भी अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह प्रशासन के जरिए समाज और देश के लिए ज्यादा बड़ा योगदान दे सकता है, तो वह अपने करियर की दिशा बदल सकता है.
किसी को पहली कोशिश में सफलता मिली, तो किसी ने कई असफलताओं के बाद मंजिल हासिल की. किसी ने नौकरी के साथ तैयारी की और किसी ने अपनी मेडिकल डिग्री के बाद पूरी तरह UPSC पर ध्यान केंद्रित किया.
इनकी कहानियों का सबसे बड़ा संदेश यही है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं होती. सही लक्ष्य, लगातार मेहनत और धैर्य के साथ करियर में नई शुरुआत की जा सकती है.

