Bihar Unemployment: बिहार में पढ़े-लिखे युवाओं के सामने रोजगार का संकट, 57% स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा नहीं
बिहार में युवाओं के सामने पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार हासिल करना बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक ओर बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी में जुटे हैं, तो दूसरी ओर तकनीकी शिक्षा और व्यावहारिक कौशल की कमी रोजगार के अवसरों को प्रभावित कर सकती है। राज्य में बेरोजगारी और स्कूलों में कंप्यूटर सुविधाओं की कमी से जुड़े आंकड़े शिक्षा व्यवस्था और रोजगार की तैयारियों पर सवाल खड़े करते हैं।
युवाओं में बेरोजगारी चिंता का विषय
Periodic Labour Force Survey (PLFS) 2025 के हवाले से दी गई जानकारी के अनुसार, बिहार में 15 से 29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 12.1 प्रतिशत बताई गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 9.8 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 31.3 प्रतिशत दर्ज होने का दावा किया गया है।
इन आंकड़ों से ग्रामीण और शहरी रोजगार की स्थिति में अंतर दिखाई देता है। हालांकि, बेरोजगारी दर का सही आकलन करने के लिए यह देखना जरूरी है कि आंकड़े किस आयु वर्ग, शिक्षा स्तर और सर्वेक्षण पद्धति पर आधारित हैं।
57 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर नहीं होने का दावा
डिजिटल दौर में कंप्यूटर का ज्ञान पढ़ाई, ऑनलाइन आवेदन और विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार पाने के लिए महत्वपूर्ण हो गया है। खबर में उद्धृत UDISE+ 2025-26 के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के 95,285 स्कूलों में से 40,960 स्कूलों में कंप्यूटर की सुविधा उपलब्ध बताई गई है।
इस हिसाब से लगभग 43 प्रतिशत स्कूलों में कंप्यूटर हैं, जबकि करीब 57 प्रतिशत स्कूलों में यह सुविधा नहीं होने का दावा किया गया है। कंप्यूटर उपलब्ध होने के बावजूद छात्रों को पर्याप्त प्रैक्टिकल प्रशिक्षण और इंटरनेट की सुविधा मिलना भी जरूरी है।
सरकारी नौकरी के लिए कड़ा मुकाबला
बिहार में सरकारी नौकरी को स्थिरता और आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है। इसी वजह से बड़ी संख्या में युवा बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं।
उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, 67वीं BPSC संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा में 802 पदों के लिए लगभग 4.8 लाख उम्मीदवार शामिल हुए थे। वहीं 70वीं परीक्षा में 2,035 पदों के लिए करीब 3.3 लाख उम्मीदवारों के शामिल होने और 71वीं परीक्षा में 1,298 पदों के लिए लगभग 3.2 लाख उम्मीदवारों के परीक्षा देने की जानकारी दी गई है।
इन आंकड़ों से सरकारी नौकरियों के लिए प्रतिस्पर्धा का अंदाजा मिलता है। ऐसे में युवाओं के लिए निजी क्षेत्र, स्वरोजगार और दूसरे रोजगार विकल्पों की जानकारी तथा तैयारी भी अहम हो जाती है।
स्किल ट्रेनिंग और अप्रेंटिसशिप पर जोर
युवाओं को रोजगार के लिए तैयार करने में कौशल प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के तहत बिहार में शामिल युवाओं की संख्या 2024-25 में 5,502 से बढ़कर 2025-26 में 9,013 बताई गई है।
हालांकि, प्रशिक्षण में भाग लेना अपने आप में स्थायी नौकरी की गारंटी नहीं है। इसके लिए जरूरी है कि प्रशिक्षण कार्यक्रम उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हों और युवाओं को व्यावहारिक अनुभव के साथ रोजगार के अवसर भी मिलें।
रोजगार बढ़ाने के लिए क्या जरूरी?
बिहार में रोजगार की स्थिति सुधारने के लिए स्कूलों में डिजिटल सुविधाओं का विस्तार, तकनीकी प्रशिक्षण, उद्योगों से जुड़ी अप्रेंटिसशिप और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना जरूरी है। युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय कंप्यूटर, डेटा प्रबंधन, डिजिटल मार्केटिंग और अन्य रोजगारपरक कौशल सिखाना भी उपयोगी हो सकता है।

