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IIT में बढ़ीं एडमिशन की सीटें, 4 साल में 2,228 सीटों का इजाफा; जानें छात्राओं के लिए क्या बदला

IIT में बढ़ीं एडमिशन की सीटें, 4 साल में 2,228 सीटों का इजाफा; जानें छात्राओं के लिए क्या बदला

 

आईआईटी में दाखिला लेने का सपना देख रहे छात्रों के लिए राहत भरी खबर है। जेईई एडवांस्ड के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2022 से 2026 के बीच देशभर के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में कुल सीट क्षमता में 13.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इस दौरान आईआईटी की कुल सीटें 16,598 से बढ़कर 18,826 हो गईं। यानी चार वर्षों में सीट क्षमता में 2,228 सीटों का इजाफा हुआ है।इस बढ़ोतरी के पीछे नए शैक्षणिक कार्यक्रमों की शुरुआत और छात्राओं के लिए सुपरन्यूमरेरी सीटों की व्यवस्था जैसे कारकों की भूमिका रही है। सुपरन्यूमरेरी सीटें सामान्य सीटों के अतिरिक्त बनाई जाती हैं, ताकि छात्राओं की भागीदारी बढ़ाई जा सके।

साल-दर-साल बढ़ीं IIT की सीटें

ज्वाइंट इंप्लीमेंटेशन कमेटी और ज्वाइंट सीट एलोकेशन अथॉरिटी (JoSAA) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले चार वर्षों में आईआईटी की सीट क्षमता में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।

  • 2022: कुल 16,598 सीटें

  • 2023: 787 सीटों की बढ़ोतरी के साथ 17,385 सीटें

  • 2024: 375 सीटों के इजाफे के साथ 17,760 सीटें

  • 2025: 400 सीटों की बढ़ोतरी के बाद 18,160 सीटें

  • 2026: 666 अतिरिक्त सीटों के साथ कुल 18,826 सीटें

इन आंकड़ों से पता चलता है कि आईआईटी में दाखिले के लिए उपलब्ध सीटों की संख्या बढ़ी है। इससे जेईई एडवांस्ड के जरिए प्रवेश पाने की कोशिश कर रहे उम्मीदवारों के लिए अवसरों का दायरा बढ़ सकता है। हालांकि, प्रवेश की वास्तविक संभावना परीक्षा में प्रदर्शन, रैंक, श्रेणी, संस्थान और चुने गए पाठ्यक्रम पर भी निर्भर करेगी।

छात्राओं के लिए सुपरन्यूमरेरी सीटों में 141% की बढ़ोतरी

आईआईटी में छात्राओं की भागीदारी बढ़ाने और लैंगिक प्रतिनिधित्व में सुधार के उद्देश्य से वर्ष 2018 में महिला नामांकन को कम से कम 20 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। इसी नीति के तहत छात्राओं के लिए अतिरिक्त सुपरन्यूमरेरी सीटों की व्यवस्था की गई।

आंकड़ों के मुताबिक, इन सीटों की संख्या 2022 में 1,567 थी, जो 2026 में बढ़कर 3,776 हो गई। इस तरह चार वर्षों में महिला सुपरन्यूमरेरी सीटों में लगभग 141 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।इन अतिरिक्त सीटों का उद्देश्य छात्राओं के लिए दाखिले के अवसर बढ़ाना है। इन्हें सामान्य जेंडर-न्यूट्रल सीटों के अतिरिक्त बनाया जाता है, इसलिए इनका उद्देश्य लड़कों के लिए उपलब्ध सामान्य सीटों को कम करना नहीं है।

IIT में छात्राओं की हिस्सेदारी कितनी बढ़ी?

महिला सुपरन्यूमरेरी सीटों की संख्या में बड़ी वृद्धि के बावजूद कुल सीट आवंटन में छात्राओं की हिस्सेदारी में अपेक्षाकृत मामूली बदलाव देखने को मिला है।

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार:

  • 2022: 16,635 आवंटित सीटों में 3,310 छात्राएं, यानी लगभग 19.9 प्रतिशत।

  • 2026: 18,861 आवंटित सीटों में 3,814 छात्राएं, यानी लगभग 20.22 प्रतिशत।

इससे पता चलता है कि आईआईटी में दाखिला पाने वाली छात्राओं की संख्या बढ़ी है, लेकिन कुल आवंटन में उनकी हिस्सेदारी अब भी लगभग पांचवें हिस्से के आसपास बनी हुई है।

सीट क्षमता और सीट आवंटन में क्या है अंतर?

आईआईटी की कुल स्वीकृत सीट क्षमता और काउंसलिंग के दौरान आवंटित सीटों की संख्या एक जैसी होना जरूरी नहीं है। वर्ष 2026 में आईआईटी की रिपोर्ट की गई सीट क्षमता 18,826 थी, जबकि JoSAA काउंसलिंग के अंतिम राउंड में 18,861 सीटें आवंटित होने का आंकड़ा दिया गया है।इन दोनों आंकड़ों के बीच अंतर को समझना जरूरी है। अतिरिक्त सुपरन्यूमरेरी सीटों या आवंटन से संबंधित व्यवस्थाओं के कारण सीट आवंटन का आंकड़ा रिपोर्ट की गई सामान्य क्षमता से अलग हो सकता है। इसलिए केवल आवंटित सीटों की संख्या के आधार पर स्वीकृत सीट क्षमता में बढ़ोतरी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

JEE Advanced के उम्मीदवारों के लिए क्या मायने हैं ये आंकड़े?

आईआईटी की सीट क्षमता में बढ़ोतरी से दाखिले के कुल अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही, छात्राओं के लिए अतिरिक्त सीटों की व्यवस्था इंजीनियरिंग शिक्षा में उनकी भागीदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।हालांकि, उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि ज्यादा सीटें होने का अर्थ हर छात्र को आईआईटी में प्रवेश मिलना नहीं

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