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Varanasi  कैंसर यूनिट बंद, अल्ट्रासाउंड के लिए दो-दो महीने की वेटिंग, ईएसआईसी अस्पताल में अव्यवस्था से मरीज हो रहे परेशान , कैंसर के इकलौते तैनात डॉक्टर के छुट्टी पर होने से बंद है ओपीडी
 

Varanasi  कैंसर यूनिट बंद, अल्ट्रासाउंड के लिए दो-दो महीने की वेटिंग, ईएसआईसी अस्पताल में अव्यवस्था से मरीज हो रहे परेशान , कैंसर के इकलौते तैनात डॉक्टर के छुट्टी पर होने से बंद है ओपीडी


उत्तरप्रदेश न्यूज़ डेस्क  कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आहट के बीच पांडेयपुर स्थित जिला अस्पताल में बच्चों का पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड में एक साल से ताला बंद है. कोरोना संक्रमित बच्चों के लिए यह 10 बेड का वार्ड बना था. इसके सभी बेड आक्सीजन सुविधा से लैस हैं. यह उद्घाटन के बाद से अब तक चालू नहीं हो पाया है.

पांडेयपुर स्थित जिला अस्पताल में बाल रोग विभाग है. अस्पताल परिसर में एमसीएच विंग भी है. अस्पताल में आने वाले गंभीर बच्चों को पीकू वार्ड की जरूरत होती है लेकिन यहां वार्ड बंद होने के कारण बच्चे बीएचयू रेफर हो रहे हैं. कोरोनाकाल में आसपास के जिलों के डॉक्टरों और तकनीशियनों को यहां तैनात किया गया था. उनके चले जाने के बाद अब अस्पताल में विशेषज्ञ की कमी है. इस कारण पीकू वार्ड भी बंद है. वार्ड की फर्श, मशीन व बेड में धूल की परत जमा हो गई.
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरके सिंह ने बताया कि जहां डिलिविरी होती है, वहां पीकू वार्ड की जरूरत होती है. यह वार्ड कोरेाना के समय बना था.
एमसीएच विंग में नहीं है पीकू वार्ड अस्पताल परिसर के एमसीएच विग में अलग से पीकू वार्ड नहीं है. ऐसे में अगर पीकू वार्ड संचालित होता तो बच्चों को रेफर करना नहीं पड़ता. अभिभावक निजी अस्पतालों में लाखों रुपये के खर्च से बच जाते.
न्यूरोलॉजिस्ट भी नहीं
अस्पताल में न्यूरो विभाग में एक भी डॉक्टर नहीं हैं. नेफ्रोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी की ओपीडी दो दिन, चेस्ट और यूरोलोजी की चार दिन होती है. पूरे सप्ताह ओपीडी नहीं होने से मरीज एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में भटक रहे हैं.


वाराणसी न्यूज़ डेस्क
 

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