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उदयपुर के निजी अस्पताल में हंगामा, IMA प्रदेश अध्यक्ष से मारपीट का आरोप; वीडियो में जाने डॉक्टरों ने हड़ताल की चेतावनी दी

उदयपुर के निजी अस्पताल में हंगामा, IMA प्रदेश अध्यक्ष से मारपीट का आरोप; वीडियो में जाने डॉक्टरों ने हड़ताल की चेतावनी दी

उदयपुर के एक निजी अस्पताल में इलाज में कथित लापरवाही को लेकर मंगलवार रात बड़ा हंगामा हो गया। परिजनों और रिश्तेदारों ने अस्पताल में विरोध प्रदर्शन किया, जिसके दौरान डॉक्टरों के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप है। घटना के बाद शहर के चिकित्सकों में भारी रोष है और हड़ताल की चेतावनी दी गई है। जानकारी के अनुसार शहर के JP Orthopedic Hospital में एक कपड़ा व्यापारी के इलाज को लेकर परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया। इसी बात को लेकर अस्पताल परिसर में विवाद बढ़ गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

डॉक्टरों के साथ मारपीट का आरोप

घटना के दौरान अस्पताल के डॉक्टरों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। मामले की जानकारी मिलने पर Indian Medical Association के प्रदेश अध्यक्ष Dr. Anand Gupta भी मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उनके साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की गई।डॉक्टर आनंद गुप्ता का आरोप है कि हमलावरों ने उनके कपड़े फाड़ दिए और उन्हें सड़क तक घसीटकर ले गए। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कथित मारपीट की तस्वीरें कैद होने का दावा किया जा रहा है।

डॉक्टरों में आक्रोश

घटना के बाद उदयपुर के चिकित्सकों में भारी नाराजगी है। डॉक्टरों का कहना है कि यदि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे सामूहिक रूप से काम बंद करने को मजबूर होंगे।फिलहाल RNT Medical College में डॉक्टरों की बैठक जारी है, जिसमें आगे की रणनीति और संभावित हड़ताल को लेकर चर्चा की जा रही है।

गिरफ्तारी की मांग

चिकित्सक संगठनों ने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पतालों और डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है और ऐसी घटनाएं चिकित्सा सेवाओं को प्रभावित कर सकती हैं।

पुलिस जांच में जुटी

पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि घटना में शामिल लोगों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।इस घटना के बाद उदयपुर में चिकित्सा सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि डॉक्टरों के आंदोलन का फैसला मरीजों के उपचार को प्रभावित कर सकता है।

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