उदयपुर में पिता ने जिंदा बेटी को मृत घोषित किया, फुटेज में जाने परिवार ने किया 'मृत्युभोज'
राजस्थान के उदयपुर जिले में एक असामान्य और विवादास्पद मामला सामने आया है, जहां एक पिता ने अपनी जिंदा बेटी को मृत घोषित कर दिया। इतना ही नहीं, पिता समेत पूरे परिवार ने बेटी के लिए गौरणी धूप दस्तूर (मृत्युभोज) भी आयोजित किया। इसके अलावा, परिवार ने बेटी को वसीयत और संपत्ति से भी बेदखल करने का निर्णय लिया है।
मामला उदयपुर शहर से सटे प्रतापनगर थाना क्षेत्र के एक गांव का है। जानकारी के अनुसार, परिवार ने दो महीने पहले अपने समाज के युवक से बेटी की शादी करवाई थी। लेकिन शादी के कुछ समय बाद ही बेटी अपने पति और ससुराल वालों को धोखा देकर प्रेमी के साथ भाग गई। इस हरकत के बाद पिता और परिवार ने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन बेटी ने किसी भी तरह की वार्ता को स्वीकार नहीं किया और अपने प्रेमी के साथ रहने की इच्छा जताई।
पिता ने बताया कि 23 जनवरी को बेटी ने ससुराल छोड़कर अपने प्रेमी के साथ भागने का फैसला किया। इसके बाद पिता ने पुलिस की मदद से 28 जनवरी को बेटी के पास पहुंचकर उसे समझाने की कोशिश की, लेकिन दो दिन में दो बार प्रयास करने के बावजूद बेटी मानने को तैयार नहीं थी। पिता ने कहा, “उसने मेरे और परिवार के साथ कोई भी संबंध रखने से इनकार कर दिया और कहा कि वह अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीना चाहती है। हमने उसे बहुत समझाया, लेकिन वह नहीं मानी। केवल उसी लड़के के साथ रहना चाहती थी। हमने उसी दिन उसे मृत मान लिया और हिंदू धर्म के अनुसार सभी सामाजिक रीति-रिवाज निभाए।”
परिवार ने बेटी के लिए मृत्युभोज का आयोजन किया और उसे संपत्ति और वसीयत से बेदखल करने का निर्णय लिया। पिता ने कहा, “अब मेरा उससे कोई लेना-देना नहीं है; मेरे लिए वह मर चुकी है।”
विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के मामले सांस्कृतिक और पारिवारिक दबाव के कारण पैदा होते हैं। हालांकि, कानून के अनुसार जिंदा व्यक्ति को मृत घोषित करना और उससे संपत्ति का दावा रोकना अवैध है। ऐसे मामलों में पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया की भूमिका अहम हो जाती है।
प्रतापनगर थाना पुलिस ने बताया कि इस मामले की सामाजिक और कानूनी जांच की जा रही है। परिवार द्वारा अपनाई गई कार्रवाई कानूनन चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि लड़की अभी जिंदा है और उसकी संपत्ति और अधिकार सुरक्षित हैं।
यह मामला उदयपुर और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक और नैतिक बहस को जन्म दे रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी घटनाएं न केवल परिवार के अंदर तनाव पैदा करती हैं, बल्कि समाज में पारिवारिक विवाद, विवाह और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दों को भी उजागर करती हैं।
संक्षेप में, उदयपुर के प्रतापनगर थाना क्षेत्र में एक पिता ने अपनी जिंदा बेटी को मृत घोषित कर मृत्युभोज आयोजित किया और वसीयत से भी बेदखल करने का निर्णय लिया। परिवार का यह कदम विवादास्पद और कानूनी दृष्टि से चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है, जबकि समाज और प्रशासन इस मामले की सटीक जांच कर रही है।

