उदयपुर में गणगौर उत्सव के बीच ‘दातन हेला’ की अनोखी परंपरा, वीडियो में देखें हजारों लोगों की उमड़ी भीड़
उदयपुर में इन दिनों गणगौर उत्सव की रौनक देखने को मिल रही है। शहर के भोईवाड़ा क्षेत्र में शुक्रवार को माली समाज की ओर से पारंपरिक आयोजन ‘दातन हेला’ का आयोजन किया गया, जो इस उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण माना जाता है। इस मौके पर पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण ‘भूत’ की डरावनी झांकी रही, जिसे देखने के लिए गलियों में हजारों लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। परंपरा के अनुसार इस भूत को ‘भोलेनाथ की चेली’ के रूप में माना जाता है और उसे पूजा भी जाता है। यह अनोखी परंपरा लोगों की आस्था और विश्वास से जुड़ी हुई है।
इस झांकी की खास बात यह है कि समाज के ही एक युवक को प्रतीकात्मक रूप से भूत का रूप दिया जाता है। उसे रस्सियों से मजबूती से बांधकर पूरे क्षेत्र की गलियों में घुमाया जाता है। इस दौरान लोग श्रद्धा और उत्साह के साथ इस परंपरा में शामिल होते हैं और जगह-जगह पर इसका स्वागत करते हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह परंपरा पिछले 50 वर्षों से भी अधिक समय से चली आ रही है। इसके पीछे मान्यता है कि नए साल की शुरुआत में इस तरह भूत को बांधकर पूरे मोहल्ले में घुमाने से इलाके की नकारात्मकता दूर होती है। लोगों का विश्वास है कि इससे बुरी शक्तियां, बीमारियां और अशुभ प्रभाव खत्म हो जाते हैं और क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
गणगौर के इस पावन अवसर पर आयोजित ‘दातन हेला’ न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को भी मजबूती प्रदान करता है। आयोजन में शामिल लोग पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए और पूरे माहौल को भक्ति और उत्साह से भर दिया।
स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए थे। आयोजन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसके लिए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए।
उदयपुर का यह अनोखा आयोजन इस बात का उदाहरण है कि किस तरह पारंपरिक मान्यताएं और सांस्कृतिक विरासत आज भी लोगों के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई हैं। ‘दातन हेला’ न केवल एक परंपरा है, बल्कि यह समाज की आस्था, विश्वास और एकता का जीवंत प्रतीक भी है।

