हल्दीघाटी युद्ध पर बड़ा बयान: मोहन भागवत ने ‘नैरेटिव’ पर उठाए सवाल, महाराणा प्रताप को बताया विजयी पक्ष, उदयपुर में चर्चा तेज वीडियो में जाने
राजस्थान के Udaipur में आयोजित राष्ट्र चेतना संकल्प सभा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक Mohan Bhagwat ने हल्दीघाटी के ऐतिहासिक युद्ध को लेकर दिए गए पारंपरिक ऐतिहासिक विवरणों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतिहासकारों ने इस युद्ध को लेकर एक निश्चित “नैरेटिव” गढ़ा है, जबकि वास्तविक घटनाओं की व्याख्या अलग दृष्टिकोण से की जानी चाहिए।
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने कहा कि हल्दीघाटी युद्ध में केवल एक पक्ष की विजय को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई ऐतिहासिक दस्तावेजों और मुगलकालीन लेखन में भी यह उल्लेख मिलता है कि युद्ध के दौरान मुगल सेना को पीछे हटना पड़ा था। इसी आधार पर उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में वास्तविक विजय किसकी मानी जाए।
यह कार्यक्रम महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया है। तीन दिवसीय इस आयोजन में देशभर से कई संत, विद्वान और संगठन प्रतिनिधि शामिल हुए हैं, जहां इतिहास, संस्कृति और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर चर्चा की जा रही है।
सभा में निम्बार्क पीठ के पीठाधीश्वर ने भी संबोधन दिया और सामाजिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज को एकजुट रहने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रतीकात्मक भाषा का उपयोग करते हुए कहा कि जीवन में नकारात्मकता से बचते हुए सकारात्मक दिशा की ओर बढ़ना चाहिए। उनके अनुसार, समाज को ऐसी दिशा अपनानी चाहिए जो एकता और विकास को बढ़ावा दे।
इस आयोजन में वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के जीवन, उनके संघर्ष और मेवाड़ के इतिहास पर भी प्रकाश डाला। Maharana Pratap को लेकर विभिन्न वक्ताओं ने उनके साहस और युद्धनीति को याद किया और उन्हें भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण नायक बताया।
कार्यक्रम के दौरान हल्दीघाटी युद्ध और उससे जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आए, जिससे यह विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस आयोजन को मेवाड़ की ऐतिहासिक धरोहर और सांस्कृतिक पहचान को पुनः स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

