महाराणा प्रताप जयंती को लेकर देश और मेवाड़ में अलग-अलग परंपराएं, वीडियो में जाने 17 जून को होंगे पारंपरिक आयोजन
देशभर में आज वीर शिरोमणि Maharana Pratap की जयंती मनाई जा रही है, लेकिन राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र में इसे पारंपरिक रूप से तिथि के अनुसार 17 जून को मनाने की पुरानी परंपरा आज भी जारी है। इस कारण जयंती को लेकर देश और क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग तिथियों पर आयोजन देखने को मिल रहे हैं।मेवाड़ में परंपरा के अनुसार महाराणा प्रताप जयंती विक्रम संवत और पारंपरिक पंचांग की तिथि के आधार पर मनाई जाती है। इसी वजह से इस वर्ष भी मेवाड़ में मुख्य आयोजन 17 जून को किए जाएंगे।
मेवाड़ राजपरिवार की ओर से जारी बयान में अपील की गई है कि परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार जयंती का आयोजन 17 जून को ही किया जाएगा। बयान में कहा गया कि महाराणा प्रताप की स्मृति और सम्मान से जुड़ी यह परंपरा सदियों पुरानी है और इसे उसी भावना के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।मेवाड़ क्षेत्र में इस अवसर पर सात दिवसीय विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इनमें ऐतिहासिक शोभायात्रा, अश्व पूजन, वीरों का स्मरण, सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धांजलि सभाएं शामिल होंगी। इन आयोजनों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों की भी भागीदारी रहती है।
वहीं देश के अन्य हिस्सों में आज 9 मई को महाराणा प्रताप जयंती के रूप में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। स्कूलों, सामाजिक संस्थाओं और सरकारी स्तर पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम और सांस्कृतिक आयोजन देखने को मिल रहे हैं।इतिहासकारों के अनुसार Maharana Pratap को उनकी वीरता, स्वतंत्रता संघर्ष और मुगलों के खिलाफ प्रतिरोध के लिए जाना जाता है। हल्दीघाटी का युद्ध उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं में से एक माना जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जयंती की तिथियों को लेकर यह अंतर भारतीय परंपराओं और आधुनिक कैलेंडर प्रणाली के बीच के अंतर को दर्शाता है, जहां एक ओर राष्ट्रीय स्तर पर एक निश्चित तिथि मानी जाती है, वहीं क्षेत्रीय परंपराएं पंचांग आधारित तिथियों का पालन करती हैं। फिलहाल मेवाड़ में तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और स्थानीय प्रशासन भी इन आयोजनों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए व्यवस्थाएं कर रहा है।

