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राजस्थान में कुत्तों के काटने के मामले बढ़े: 2025 में लगभग दोगुना उछाल, जयपुर सबसे ज्यादा प्रभावित

राजस्थान में कुत्तों के काटने के मामले बढ़े: 2025 में लगभग दोगुना उछाल, जयपुर सबसे ज्यादा प्रभावित

राजस्थान में कुत्तों के काटने की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि देखने को मिली है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में इन मामलों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है, जिससे राज्य में स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा हो गई है।

राजधानी जयपुर इस मामले में सबसे अधिक प्रभावित जिला रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में जयपुर में कुत्तों के काटने के 307 मामले दर्ज किए गए थे, जो वर्ष 2025 में बढ़कर 633 तक पहुंच गए। यह आंकड़ा राज्य में किसी भी जिले के मुकाबले सबसे अधिक है और दोनों वर्षों में भी जयपुर शीर्ष पर बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, समय पर नसबंदी की कमी और कचरा प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था इस बढ़ोतरी के प्रमुख कारण हो सकते हैं। कई इलाकों में कुत्तों का झुंड लोगों पर अचानक हमला कर देता है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों को अधिक खतरा रहता है।

सरकारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कुत्तों के काटने के मामलों में बढ़ोतरी से एंटी-रेबीज वैक्सीन की मांग भी बढ़ी है। अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है, जिन्हें तुरंत उपचार और टीकाकरण की आवश्यकता होती है।

वहीं, स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने की बात कही है। इसमें आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और जागरूकता अभियान चलाने जैसे उपाय शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि नगर निकायों को इस समस्या के समाधान के लिए और अधिक सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

विशेषज्ञों ने आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। बच्चों को आवारा कुत्तों से दूरी बनाए रखने और रात के समय अकेले बाहर निकलने से बचने की हिदायत दी गई है। साथ ही, कुत्ते के काटने की स्थिति में तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर एंटी-रेबीज टीका लगवाने की सलाह दी गई है।

यह बढ़ता हुआ आंकड़ा न केवल एक स्वास्थ्य समस्या को दर्शाता है, बल्कि शहरों में बढ़ती आवारा पशुओं की समस्या पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी गंभीर रूप ले सकती है।

इस प्रकार, राजस्थान में कुत्तों के काटने की घटनाओं में तेजी से हुई वृद्धि ने प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।

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