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सलूंबर में गांव के नाम को लेकर विवाद, वीडियो में देखें ग्रामीणों ने ‘सांगा बावड़ी’ नाम को आधिकारिक मान्यता देने की उठाई मांग

सलूंबर में गांव के नाम को लेकर विवाद, वीडियो में देखें ग्रामीणों ने ‘सांगा बावड़ी’ नाम को आधिकारिक मान्यता देने की उठाई मांग

राजस्थान के सलूंबर जिले में एक गांव के अलग-अलग नामों को लेकर स्थिति अब विवाद का विषय बन गई है। सराड़ा तहसील के परसाद क्षेत्र में स्थित इस गांव के तीन अलग-अलग नामों के चलते ग्रामीणों ने एकीकृत पहचान की मांग उठाई है और गांव को ‘सांगा बावड़ी’ नाम से आधिकारिक रूप से मान्यता देने की अपील की है।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव में स्थित ऐतिहासिक बावड़ी का निर्माण महाराणा सांगा द्वारा करवाया गया था, जिसके कारण यह क्षेत्र लंबे समय से लोक-परंपरा और बोलचाल में ‘सांगा बावड़ी’ के नाम से ही जाना जाता रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, यही नाम उनकी वास्तविक और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।

हालांकि, प्रशासनिक दस्तावेजों और विभिन्न स्थानों पर गांव के अलग-अलग नाम दर्ज होने से ग्रामीणों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। गांव के मार्ग पर लगे मील के पत्थरों पर जहां ‘सांगा बावजी’ अंकित है, वहीं स्थानीय स्कूल के रिकॉर्ड में गांव का नाम ‘मेघात फला’ दर्ज है, जो ग्रामीणों के अनुसार उनकी वास्तविक पहचान से मेल नहीं खाता।

इस नाम भिन्नता के कारण न केवल प्रशासनिक कार्यों में असुविधा हो रही है, बल्कि ग्रामीणों को पहचान संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्षों से अपने गांव को ‘सांगा बावड़ी’ के नाम से ही जानते और पहचानते आए हैं, इसलिए इसी नाम को आधिकारिक रूप दिया जाना चाहिए।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के सभी रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेज और संकेत बोर्डों में एक समान नाम ‘सांगा बावड़ी’ दर्ज किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी तरह की भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

फिलहाल यह मामला स्थानीय प्रशासन के संज्ञान में है और ग्रामीणों की मांग पर विचार किए जाने की संभावना जताई जा रही है। गांव की पहचान को लेकर उठा यह मुद्दा अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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