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जन्मभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा, कर्पूर चन्द्र कुलिश के विचार आज भी प्रेरणादायी

जन्मभूमि के प्रति अटूट श्रद्धा, कर्पूर चन्द्र कुलिश के विचार आज भी प्रेरणादायी

“मेरी जन्मभूमि से आने वाले हर व्यक्ति के पैरों की माटी से मेरा घर पवित्र होता है।” यह विचार दर्शाता है कि अपनी मिट्टी और अपने लोगों के प्रति कितना गहरा लगाव था कर्पूर चन्द्र कुलिश का। अपनी जन्मस्थली टोंक जिले के मालपुरा क्षेत्र स्थित गांव सोडा के प्रति उनका यह भाव आज भी लोगों के दिलों में जीवंत है।

राजस्थान पत्रिका के संस्थापक कुलिश जी का अपने गांव और वहां के लोगों के प्रति विशेष स्नेह और सम्मान था। वे हमेशा मानते थे कि व्यक्ति चाहे कितनी भी ऊंचाइयों पर पहुंच जाए, उसे अपनी जड़ों को नहीं भूलना चाहिए। यही कारण है कि वे अपनी जन्मभूमि के लोगों से जुड़ाव बनाए रखते थे और उनके सुख-दुख में सहभागी रहते थे।

उनका यह संदेश केवल शब्दों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनके जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता था। उन्होंने अपने कार्यों और विचारों के माध्यम से समाज को यह सिखाने का प्रयास किया कि अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति और अपने लोगों का सम्मान करना ही सच्ची मानवता है।

गांव सोडा के लोगों के लिए भी कुलिश जी एक प्रेरणा स्रोत रहे हैं। उनकी सोच और कार्यशैली ने यह साबित किया कि यदि व्यक्ति समाज के प्रति समर्पित रहे, तो वह न केवल अपने क्षेत्र का बल्कि पूरे समाज का उत्थान कर सकता है।

आज के समय में जब लोग शहरी जीवन और आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे हैं, ऐसे में कुलिश जी के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका यह संदेश हमें याद दिलाता है कि अपनी जन्मभूमि से जुड़ाव बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है।

कुल मिलाकर, कर्पूर चन्द्र कुलिश का जीवन और उनके विचार हमें यह सिखाते हैं कि अपनी जन्मभूमि के प्रति सम्मान और प्रेम ही सच्ची पहचान है, और यही भावना हमें एक बेहतर इंसान बनाती है।

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