वीडियो में देंखे फागी में द्वारकाधीश मंदिर में आयोजित फूलडोल मेले में डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा ने भजनों और लोकगीतों की धूम मचाई
जयपुर जिले के फागी क्षेत्र में मांसी नदी किनारे स्थित द्वारकाधीश मंदिर परिसर में बुधवार को फूलडोल मेला का आयोजन किया गया। इस मेले में मुख्य अतिथि के रूप में प्रेमचंद बैरवा शामिल हुए।
मेले का आयोजन हर साल की तरह इस बार भी पारंपरिक रूप से किया गया। डिप्टी सीएम ने पहले मंदिर में भगवान द्वारकाधीश के दर्शन किए और क्षेत्र में कुशलता और समृद्धि की कामना की। इसके बाद उन्होंने भजन मंडली के साथ मिलकर ढोलक और मंजीरों की थाप पर भजन गाए।
डिप्टी सीएम ने भजन मंडली के कलाकारों से माइक लिया और स्वयं राजस्थानी भजन और लोकगीत पेश किए। उनके गाए भजनों और गीतों ने वहां मौजूद लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद उन्होंने मंजीरे भी बजाए और कलाकारों के साथ मिलकर लोकनृत्य में भाग लिया। दर्शकों ने डिप्टी सीएम के इस उत्साही प्रदर्शन की जमकर सराहना की।
फूलडोल मेला का आयोजन क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को जीवित रखने के लिए किया जाता है। यह मेला लोगों को न केवल भगवान द्वारकाधीश के प्रति आस्था प्रकट करने का अवसर देता है, बल्कि राजस्थान की लोककला और लोकगीतों को भी बढ़ावा देता है।
कार्यक्रम में शामिल स्थानीय लोगों ने बताया कि डिप्टी सीएम के साथ भजन गाना और लोकगीत प्रस्तुत करना उनके लिए एक अद्भुत अनुभव रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने इस सांस्कृतिक आयोजन का आनंद लिया और कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया।
मेला स्थल पर सजावट, फूलों की रंगोली और पारंपरिक संगीत ने वातावरण को और भी भक्तिमय बना दिया। भक्तों ने बताया कि फूलडोल मेला हर साल क्षेत्रवासियों के लिए आस्था और उत्सव का प्रतीक बन चुका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मेलों और धार्मिक आयोजनों से न केवल सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित किया जा रहा है, बल्कि स्थानीय पर्यटन और अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिलता है। लोगों को पारंपरिक संगीत, नृत्य और भजन के माध्यम से अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
डिप्टी सीएम प्रेमचंद बैरवा के उत्साही भागीदारी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई और दर्शकों में आनंद और उत्साह का माहौल बनाया। उनके इस कदम को स्थानीय प्रशासन और आयोजकों ने भी सराहा।
इस प्रकार, फागी के द्वारकाधीश मंदिर में आयोजित यह फूलडोल मेला धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का सुंदर मिश्रण साबित हुआ। आयोजन ने साबित कर दिया कि राजस्थान में लोककला और भक्ति का उत्सव आज भी जीवित और सक्रिय है।

