मिस्त्री के भेष में ISI का एजेंट प्रकाश सिंह, पकिस्तान में ISI से टेलीग्राम और व्हाट्सएप के ज़रिये लेता था निर्देश
राजस्थान CID इंटेलिजेंस ने श्रीगंगानगर से गिरफ्तार किए गए संदिग्ध पाकिस्तानी ISI एजेंट प्रकाश सिंह उर्फ बादल को मंगलवार को जयपुर मेट्रोपॉलिटन फर्स्ट चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपी को 11 दिसंबर तक 10 दिन की पुलिस रिमांड पर CID को सौंप दिया। CID इंटेलिजेंस को 27 नवंबर को जानकारी मिली थी कि प्रकाश सिंह श्रीगंगानगर के साधुवाली मिलिट्री एरिया के पास संदिग्ध गतिविधियों में शामिल है। बॉर्डर इंटेलिजेंस टीम ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसके आधार पर उसके मोबाइल फोन पर पाकिस्तानी और विदेशी WhatsApp नंबरों से रेगुलर संपर्क के सबूत मिले।
WhatsApp और Telegram के ज़रिए संपर्क
जासूस प्रकाश WhatsApp और Telegram समेत सोशल मीडिया के ज़रिए पाकिस्तान में अपने हैंडलर्स के संपर्क में रहता था। यहीं से उसे पाकिस्तान से निर्देश मिलते थे। खास बात यह है कि प्रकाश लोगों को बताता था कि वह मार्बल मिस्त्री है। इसी आड़ में वह इंडियन आर्मी से जुड़ी सेंसिटिव जानकारी पाकिस्तान भेजता था। 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान ISI के संपर्क में आया
आगे की जांच में पता चला कि प्रकाश उर्फ बादल 'ऑपरेशन सिंदूर' के समय से ही ISI के संपर्क में था। वह भारतीय सेना की गतिविधियों, सैन्य वाहनों की आवाजाही, सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक जानकारी, पुलों और सड़कों जैसी संवेदनशील जानकारी पहुंचाने के लिए जिम्मेदार था। इसके अलावा, वह पाकिस्तानी एजेंटों के कहने पर भारतीय नागरिकों के मोबाइल नंबरों के लिए OTP भी देता था।
वित्तीय लेन-देन में भी मदद की
इस OTP का इस्तेमाल करके, दुश्मन एजेंटों ने भारतीय नंबरों से WhatsApp अकाउंट बनाए और जासूसी और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया। बदले में प्रकाश ने वित्तीय लेन-देन में भी मदद की। शुरुआती जांच और तकनीकी विश्लेषण से सभी आरोपों की पुष्टि होने के बाद, आरोपी के खिलाफ जयपुर के स्पेशल पुलिस स्टेशन में ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट, 1923 के तहत मामला दर्ज किया गया और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

