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Shri ganganagar श्रीगंगानगर के साहित्य पर दूसरे दिन हुई चर्चा: वक्ता ने कहा, 'साहित्य रचना के लिए विषय में डूबना जरूरी'

Shri ganganagar श्रीगंगानगर के साहित्य पर दूसरे दिन हुई चर्चा: वक्ता ने कहा, 'साहित्य रचना के लिए विषय में डूबना जरूरी'

राजस्थान न्यूज डेस्क, साहित्य की रचना के लिए विषय में डूबना आवश्यक है। जब तक कि विषय को पूरी गहराई में न उतारा जाए। साहित्यकार अपनी सारी भावना उसमें नहीं डालेगा, तब तक साहित्यिक रचना बहुत समृद्ध नहीं होगी। यह कहना है टंटिया विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डॉ. राजेंद्र गोदारा का। गोदारा रविवार को श्रीगंगानगर स्थित चितलांगिया भवन में जिला साहित्य सम्मेलन के दूसरे दिन समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन राजस्थान साहित्य अकादमी उदयपुर एवं सृजन सेवा संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

उन्होंने कहा कि जैसा कि हम हिंदी फिल्मों में देखते हैं कि कलाकार अपने अभिनय में पूरी तरह से अपनी भावनाओं को झोंक देते हैं, तो उनकी कला भी निखर कर सामने आती है। वह दर्शकों को पर्दे पर बांधे रखती हैं। उसी प्रकार एक लेखक के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने लेखन में अपनी समस्त भावनाओं को उकेर दे। उन्होंने कहा कि मार्मिकता का चित्रण साहित्य को समृद्ध करता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कर्नल पंकज सिंह ने कहा कि यद्यपि उनका क्षेत्र साहित्य का नहीं है, लेकिन साहित्य जगत में उनकी रुचि है। शहर में इस तरह के आयोजन होते रहना अच्छी परंपरा है। इससे क्षेत्र के लोगों का जुड़ाव साहित्य से बना रहता है। कहानियों की समीक्षा
पिछले सत्र में श्रीगंगानगर का साहित्य: एक दृष्टि विषय पर बोलते हुए चौधरी बल्लूराम गोदारा राजकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ. आशाराम भार्गव ने पत्र पढ़ा। उन्होंने क्षेत्र की कहानियों की समीक्षा करते हुए कहा कि श्रीगंगानगर में भी कहानी से जुड़ा काफी अच्छा काम किया गया है।
श्रीगंगानगर न्यूज डेस्क!!!
 

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