‘बिल्डिंग तो ठीक है, पर क्या बच्चा स्कूल में सेफ रहेगा?’ – अमायरा केस के बाद सीकर के पेरेंट्स ने उठाई 3 बड़े बदलाव की मांग
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में 9 वर्षीय छात्रा अमायरा की हृदयविदारक मौत ने राजस्थान के अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना के बाद सीकर के पेरेंट्स ने बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर तीन बड़े बदलाव की मांग उठाई है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
पेरेंट्स का कहना है कि स्कूल का इन्फ्रास्ट्रक्चर भले ही शानदार हो, बच्चों की सुरक्षा और देखभाल उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने NDTV से खास बातचीत में कहा, “हमें केवल बड़ी बिल्डिंग और ऊंची फीस नहीं चाहिए। हमें चाहिए कि हमारे बच्चे सुरक्षित और मानसिक रूप से स्वस्थ माहौल में पढ़ें।”
सीकर के पेरेंट्स ने तीन मुख्य बदलाव की मांग रखी है:
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सुरक्षा बढ़ाना: बच्चों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे, गेट्स पर सुरक्षा कर्मी और हर क्लास में शिक्षक की निगरानी अनिवार्य की जाए। पेरेंट्स ने जोर दिया कि आपातकालीन परिस्थितियों में बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए नियमित फायर और आपातकालीन ड्रिल आयोजित हों।
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मानसिक स्वास्थ्य पर फोकस: पेरेंट्स ने कहा कि स्कूलों में साइकोलॉजिकल काउंसलर और मेंटल हेल्थ विशेषज्ञ हर समय उपलब्ध हों। उन्होंने बताया कि बच्चों की मानसिक सुरक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी उनकी शारीरिक सुरक्षा।
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पारदर्शिता और नियमित ऑडिट: अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों में सुरक्षा, स्वास्थ्य और आपातकालीन प्रबंधन के ऑडिट समय-समय पर हों और इसके परिणाम सार्वजनिक किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि स्कूल प्रशासन को अभिभावकों के साथ संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि किसी भी घटना के तुरंत बाद प्रतिक्रिया सुनिश्चित हो।
विशेषज्ञों का कहना है कि अमायरा केस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल भव्य स्कूल बिल्डिंग और सुविधाओं पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों की सुरक्षा, देखभाल और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने स्कूल प्रशासन से आग्रह किया कि सुरक्षा मानकों और बच्चों की देखभाल के लिए कठोर नियम लागू किए जाएं।
स्कूल प्रशासन ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा है कि जांच पूरी होने तक सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने पेरेंट्स को भरोसा दिलाया कि भविष्य में सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सीकर के पेरेंट्स ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से भी अपील की है कि वे स्कूलों में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य मानकों को सुनिश्चित करने के लिए नियमों को सख्ती से लागू करें। उनका कहना है कि बच्चों का सुरक्षित माहौल केवल परिवार का नहीं, बल्कि समाज और सरकार की जिम्मेदारी भी है।
अमायरा की मौत ने पूरे राजस्थान में यह सवाल खड़ा कर दिया है: “बिल्डिंग तो शानदार है, पर क्या बच्चा स्कूल में सुरक्षित है?” अब यह देखना बाकी है कि शिक्षा विभाग, स्कूल प्रशासन और अभिभावक मिलकर सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के लिए क्या ठोस कदम उठाते हैं।

