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सीकर में रिटायर्ड CA से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 1 करोड़ से ज्यादा की ठगी, वीडियो में जानें 24 दिन तक डराकर ट्रांसफर कराए पैसे

सीकर में रिटायर्ड CA से ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 1 करोड़ से ज्यादा की ठगी, वीडियो में जानें 24 दिन तक डराकर ट्रांसफर कराए पैसे

राजस्थान के सीकर जिले में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर अपराधियों ने एक रिटायर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट को 24 दिन तक “डिजिटल अरेस्ट” में रखकर उनसे 1 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर ली।

पीड़ित Hanuman Singh, जो टैगोर स्कूल क्षेत्र, सीकर के निवासी हैं, ने सोमवार को साइबर पुलिस थाने में इस संबंध में मामला दर्ज कराया है। मामले की जांच पुलिस द्वारा शुरू कर दी गई है। Sikar साइबर थाना पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता पहले गुरुग्राम में चार्टर्ड अकाउंटेंट के पद से रिटायर हो चुके हैं और वर्तमान में सीकर में रह रहे हैं।

साइबर थाना के DSP Jeevanlal Khatri ने बताया कि यह मामला बेहद संगठित साइबर फ्रॉड का है। पीड़ित को 1 अप्रैल को अनजान नंबरों से कॉल आया था। शुरुआत में उन्होंने कॉल को नजरअंदाज कर दिया, लेकिन बाद में व्हाट्सएप कॉल और धमकियों का सिलसिला शुरू हो गया।

ठगों ने खुद को जांच एजेंसियों से जुड़ा बताया और वीडियो कॉल के जरिए फर्जी FIR, कोर्ट की कार्यवाही और ईडी-सीबीआई जैसी संस्थाओं की कार्रवाई का डर दिखाया। इस दौरान पीड़ित को लगातार मानसिक दबाव में रखा गया और उन्हें “डिजिटल अरेस्ट” में होने का दावा कर डराया गया।

4 अप्रैल से 27 अप्रैल तक लगभग 24 दिनों तक पीड़ित को मानसिक रूप से नियंत्रित रखा गया और इस दौरान अलग-अलग खातों में कुल 1 करोड़ 3 लाख 81 हजार रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। साइबर पुलिस के अनुसार, यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से चलाया गया, जिसमें अपराधियों ने तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव दोनों का इस्तेमाल किया।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और ट्रांजेक्शन डिटेल्स के आधार पर आरोपियों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह गिरोह किस राज्य या देश से ऑपरेट हो रहा था।

अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें, विशेषकर जब कोई खुद को पुलिस, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर डराने की कोशिश करे। साइबर पुलिस ने कहा कि कोई भी सरकारी एजेंसी इस तरह वीडियो कॉल पर “डिजिटल अरेस्ट” नहीं करती है। यह मामला एक बार फिर डिजिटल ठगी और साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत को उजागर करता है।

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