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खाटू मेले में श्रद्धालुओं की कमी से व्यापार प्रभावित, वीडियो में जाने कम रही भीड़

खाटू मेले में श्रद्धालुओं की कमी से व्यापार प्रभावित, वीडियो में जाने कम रही भीड़

बाबा खाटूश्यामजी के प्रसिद्ध मेले में इस बार श्रद्धालुओं की कमी देखी जा रही है, जिससे रेस्ट हाउस संचालक, दुकानदार और व्यापारियों के लिए परेशानियां बढ़ गई हैं। खाटू मेला, जो पहले लाखों श्रद्धालुओं से गुलजार रहता था, इस बार अपेक्षाकृत सूनापन का सामना कर रहा है। मेले में न तो पहले जैसी भीड़ है, और न ही व्यापार में उतनी गति। रेस्ट हाउस संचालक और दुकानदार अब अपने खर्चे बमुश्किल निकाल पा रहे हैं।

खाटू मेले के रेस्ट हाउस संचालक और दुकानदारों का कहना है कि इस बार का मेला उम्मीदों के बिल्कुल विपरीत रहा है। बच्चों के खिलौने बेचने वाले दुकानदार बताते हैं कि उनका माल अब तक 20 प्रतिशत भी नहीं बिका है। "हमने सोचा था कि इस बार व्यापार में अच्छी कमाई होगी, लेकिन भीड़ न होने की वजह से हम अब तक अपने खर्चे भी नहीं निकाल पा रहे हैं।" – एक दुकानदार ने नाम न बताने की शर्त पर कहा।

होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं की हालत भी बहुत खराब है। आम दिनों में जहां इन जगहों पर कमरे के लिए मारामारी होती थी, वहीं इस बार इन जगहों पर कमरे खाली पड़े हैं। श्रद्धालुओं की संख्या में कमी के कारण यहां के व्यवसायी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। कई होटल और गेस्ट हाउस संचालक तो चिंता में हैं कि वे अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं, और उनके लिए कर्मचारियों का वेतन और मेंटेनेंस खर्चा पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है।

हालांकि, प्रशासन और श्रीश्याम मंदिर कमेटी ने 26 फरवरी तक 10 लाख 35 हजार श्रद्धालुओं के खाटू आने का दावा किया है, लेकिन विशेषज्ञ इस आंकड़े को लेकर संशय व्यक्त कर रहे हैं। उनका कहना है कि इतने लोग आने की संभावना कम है, क्योंकि स्थानीय दुकानदारों और रेस्ट हाउस संचालकों का कहना है कि इस बार भीड़ में कमी ही रही है।

इतिहास में खाटू मेला राजस्थान के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में एक माना जाता है, जहां लाखों श्रद्धालु बाबा खाटूश्यामजी के दर्शन के लिए आते थे। लेकिन इस साल के मेले में यह उत्साह और श्रद्धालु संख्या कम नजर आई है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कोरोना महामारी के बाद से मेले में श्रद्धालुओं की संख्या में काफी गिरावट आई है, और यह लगातार प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि स्थिति इसी तरह रही, तो उनके लिए आगामी दिनों में और भी मुश्किलें पैदा हो सकती हैं। "हम सब उम्मीद कर रहे हैं कि अगले कुछ दिनों में भीड़ बढ़े, जिससे हमें अपने व्यापार को पटरी पर लाने का मौका मिले।" – एक होटल संचालक ने कहा।

यही नहीं, खाटू कस्बे में पर्यटकों की कमी का असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। होटल, गेस्ट हाउस, दुकानदार और स्थानीय लोग इस बात से परेशान हैं कि अगर श्रद्धालु नहीं आए तो उनका कारोबार और जीवनयापन भी संकट में पड़ सकता है। कुल मिलाकर, खाटू मेला इस बार कम श्रद्धालुओं के कारण एक हद तक नीरस और मंदा साबित हो रहा है, जिससे व्यापारियों और स्थानीय लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

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