राजस्थान पुलिस की लापरवाही से प्रदेश में मचा सियासी बवाल, पुलिस कस्टडी में मोबाइल पर बात करते हिस्ट्रीशीटर का वीडियो वायरल
राजस्थान के सीकर जिले से कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। लूट और मारपीट के आरोपी हिस्ट्रीशीटर का पुलिस कस्टडी में मोबाइल फोन पर बात करते हुए वीडियो वायरल हो गया है। इस घटना के सामने आते ही जिले में हड़कंप मच गया है और पुलिस महकमे में भी खलबली मच गई है।
वीडियो में देखा जा सकता है कि आरोपी, जो कि पहले से ही कई आपराधिक मामलों में नामजद है, बेहद सहजता से मोबाइल फोन पर बातचीत कर रहा है। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही चर्चा का विषय बन गया और पुलिस विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।
इस गंभीर लापरवाही को लेकर सीकर एसपी ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक एएसआई और दो कांस्टेबलों को सस्पेंड कर दिया है। एसपी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं और ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, यह वीडियो उस वक्त का है जब आरोपी को एक थाने में पूछताछ के लिए लाया गया था। हालांकि, उसके पास मोबाइल फोन कैसे पहुंचा और वह कैसे पुलिस की निगरानी में फोन पर बात करने में सक्षम हुआ, यह जांच का विषय बना हुआ है।
फिलहाल मामले की विभागीय जांच जारी है, और पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर यह लापरवाही कैसे हुई और इसमें कौन-कौन शामिल है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी को मोबाइल मिलने की जानकारी जैसे ही मिली, तुरंत कार्रवाई की गई और संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया। साथ ही थाने के सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी रजिस्टर की भी जांच की जा रही है।
यह घटना न केवल पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाती है बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह से अपराधी पुलिस कस्टडी में भी खास सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं। आम जनता के बीच यह मुद्दा कानून व्यवस्था को लेकर चिंता का कारण बनता जा रहा है।
जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जांच निष्पक्ष रूप से की जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। वहीं आम लोग और सामाजिक संगठनों ने भी इस मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस सुधारों की मांग उठाई है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या पुलिस हिरासत में भी अपराधी इतने स्वतंत्र हो सकते हैं, और क्या ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

