सवाईमाधोपुर में पटवारी का रिश्वत लेते वीडियो वायरल, नामांतरण के बदले पैसे लेने का आरोप; वीडियो में जाने जांच की उठी मांग
राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में राजस्व विभाग से जुड़ा एक कथित रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। खंडार उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत कुरेड़ी में कार्यरत पटवारी पप्पू कोली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। वीडियो में वह कथित तौर पर एक किसान से जमीन के नामांतरण (म्यूटेशन) के बदले नकदी लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।जानकारी के अनुसार, यह वीडियो 25 जून का बताया जा रहा है, जबकि यह अब सार्वजनिक हुआ है।
नामांतरण के लिए पहले 36 हजार, फिर 15 हजार में हुई बात
ग्रामीणों के अनुसार, किसान को 12 बीघा कृषि भूमि का नामांतरण कराना था। आरोप है कि इसके लिए पहले प्रति बीघा 3 हजार रुपये के हिसाब से कुल 36 हजार रुपये की मांग की गई।बाद में कथित तौर पर दोनों पक्षों के बीच 15 हजार रुपये में सहमति बनी। वायरल वीडियो में रकम को लेकर बातचीत होने और नकदी का लेन-देन दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग में नामांतरण जैसे सामान्य कार्य भी बिना पैसे दिए नहीं हो रहे हैं। उनका कहना है कि किसानों को अपनी ही जमीन के वैध दस्तावेज बनवाने के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और कथित रूप से अवैध मांगों का सामना करना पड़ता है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी हो चुकी है शिकायत
ग्रामीणों का कहना है कि गौरी शंकर नाम के एक व्यक्ति ने भी पहले इसी पटवारी के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत संबंधित अधिकारियों से की थी। हालांकि, उस शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पटवारी ने आरोपों से किया इनकार
वायरल वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए पटवारी पप्पू कोली ने कहा कि उन्हें इस वीडियो के बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने वीडियो और लगाए गए आरोपों से अनभिज्ञता जताई।वहीं, इस मामले में शिकायतकर्ता पक्ष से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।
जांच के बाद होगी आगे की कार्रवाई
फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक कार्रवाई या जांच रिपोर्ट सामने नहीं आई है। यदि वीडियो की सत्यता की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। यह मामला एक बार फिर राजस्व विभाग में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के मुद्दे को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। अब सभी की नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर टिकी है।

