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रणथंभौर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की हुई हेल्थ मॉनिटरिंग, फुटेज में देखें बाघ, चीतल, सांभर और मगरमच्छ सभी पुरी तरह स्वस्थ

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की हुई हेल्थ मॉनिटरिंग, फुटेज में देखें बाघ, चीतल, सांभर और मगरमच्छ सभी पुरी तरह स्वस्थ

राजस्थान के प्रसिद्ध रणथंभौर टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर एक महत्वपूर्ण हेल्थ मॉनिटरिंग और डिजीज सर्विलांस अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान के दौरान बाघ, चीतल, सांभर, हिरण (डियर) और मगरमच्छ सहित विभिन्न वन्यजीवों की स्वास्थ्य स्थिति का गहन परीक्षण किया गया, जिसमें सभी जानवर पूरी तरह से स्वस्थ पाए गए।

वन्यजीवों की सेहत पर बारीकी से नजर

रणथंभौर वाइल्डलाइफ हॉस्पिटल के डिप्टी डायरेक्टर (पशुपालन) डॉ. मीणा के नेतृत्व में यह हेल्थ मॉनिटरिंग की गई। टीम ने वन्यजीवों के व्यवहार, शारीरिक गतिविधियों और स्वास्थ्य संकेतकों का विस्तृत अध्ययन किया। डॉ. मीणा ने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत जानवरों की चाल-ढाल (गेट), प्राकृतिक शरीर से निकलने वाले स्राव, आंखों से निकलने वाला तरल, यूरिन करने का व्यवहार, शरीर पर किसी भी प्रकार के घाव, त्वचा संबंधी बीमारियां और श्वसन दर जैसी कई महत्वपूर्ण बातों का निरीक्षण किया गया।

सभी वन्यजीव स्वस्थ पाए गए

अभियान के दौरान यह राहत की बात सामने आई कि सभी निरीक्षित वन्यजीव पूरी तरह से स्वस्थ पाए गए। किसी भी प्रकार की गंभीर बीमारी या संक्रमण के संकेत नहीं मिले, जिससे रिजर्व प्रशासन ने संतोष जताया है। बाघों से लेकर चीतल, सांभर और मगरमच्छ तक सभी प्रजातियों में किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या नहीं पाई गई।

डिजीज सर्विलांस का उद्देश्य क्या है?

डॉ. मीणा ने इस दौरान वन विभाग के स्टाफ को वन्यजीवों की सैंपलिंग और हेल्थ मॉनिटरिंग की आधुनिक तकनीकों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजीज सर्विलांस का मुख्य उद्देश्य किसी भी बीमारी के फैलने से पहले ही उसके शुरुआती संकेतों की पहचान करना है, ताकि समय रहते नियंत्रण किया जा सके। यह प्रक्रिया वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि जंगल में किसी भी बीमारी का फैलाव तेजी से बड़े क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है।

वन्यजीवों के व्यवहार से मिलते हैं स्वास्थ्य संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार वन्यजीवों के व्यवहार और शारीरिक लक्षण उनके स्वास्थ्य की स्थिति को दर्शाते हैं। जैसे कि उनकी चाल में बदलाव, सुस्ती, असामान्य व्यवहार, खाने-पीने की आदतों में परिवर्तन और सांस लेने की दर में बदलाव किसी भी बीमारी के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इन्हीं संकेतों के आधार पर नियमित रूप से निगरानी की जाती है ताकि समय रहते इलाज या रोकथाम की कार्रवाई की जा सके।

संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में किया गया यह हेल्थ मॉनिटरिंग अभियान वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल बाघों और अन्य जानवरों की सेहत पर नजर रखी जा रही है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सुरक्षित रखने में भी मदद मिल रही है।

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