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रणथंभौर की ‘क्वीन’ बाघिन टी-107 सुल्ताना ने फिर बदला ठिकाना, फुटेज में देखें शावकों को मुंह में दबाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया

रणथंभौर की ‘क्वीन’ बाघिन टी-107 सुल्ताना ने फिर बदला ठिकाना, फुटेज में देखें शावकों को मुंह में दबाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया

रणथंभौर टाइगर रिजर्व की ‘क्वीन’ कही जाने वाली मशहूर बाघिन टी-107 सुल्ताना एक बार फिर अपने शावकों को शिफ्ट करती हुई दिखाई दी। सोमवार सुबह बाघिन अपने दोनों शावकों को मुंह में दबाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाती नजर आई। इस दौरान वन विभाग ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए त्रिनेत्र गणेश मंदिर जाने वाले मार्ग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

जानकारी के अनुसार, बाघिन सुल्ताना इससे पहले भी मिश्रदर्रा गेट क्षेत्र की एक गुफा से अपने शावकों को जंगल की ओर ले जाती देखी गई थी। सोमवार सुबह जैसे ही बाघिन का मूवमेंट त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग के आसपास देखा गया, वन विभाग तुरंत सतर्क हो गया। सुरक्षा कारणों से करीब ढाई किलोमीटर लंबे मंदिर मार्ग को लगभग आधे घंटे के लिए बंद रखा गया।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व प्रशासन का कहना है कि बाघिन अपने शावकों की सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क रहती है। अक्सर वह शावकों को खतरे से दूर और अधिक सुरक्षित स्थानों पर ले जाती रहती है। इस तरह के मूवमेंट सामान्य रूप से बाघिनों के मातृत्व व्यवहार का हिस्सा होते हैं, लेकिन इंसानी गतिविधियों वाले क्षेत्रों के पास यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि त्रिनेत्र गणेश मंदिर मार्ग से रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक गुजरते हैं। ऐसे में बाघिन और उसके शावकों की मौजूदगी को देखते हुए किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया गया। जैसे ही बाघिन अपने शावकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर चुकी, उसके बाद मार्ग को फिर से खोल दिया गया और आवागमन सामान्य कर दिया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाघिन सुल्ताना बेहद सतर्कता के साथ अपने शावकों को एक-एक कर मुंह में दबाकर ले जाती दिखाई दी। इस दृश्य ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों को रोमांचित भी किया, लेकिन सुरक्षा कारणों से लोगों को मौके से दूर रखा गया।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व में टी-107 सुल्ताना को एक ताकतवर और समझदार बाघिन के रूप में जाना जाता है। वह पहले भी कई बार अपने क्षेत्र की सीमाओं में बदलाव करती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि शावकों के बड़े होने के साथ-साथ बाघिन सुरक्षित इलाकों की तलाश में लगातार स्थान बदलती रहती है, ताकि शावक अन्य बाघों या इंसानी गतिविधियों से सुरक्षित रह सकें।

फिलहाल वन विभाग की टीम बाघिन और उसके शावकों की लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। कैमरा ट्रैप और गश्त के जरिए उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। विभाग ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से अपील की है कि वे वन विभाग के निर्देशों का पालन करें और किसी भी स्थिति में वन्यजीवों के करीब जाने का प्रयास न करें।

रणथंभौर प्रशासन का कहना है कि बाघिन और शावकों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर आगे भी ऐसे मार्ग अस्थायी रूप से बंद किए जा सकते हैं, ताकि इंसान और वन्यजीवों के बीच किसी भी तरह के टकराव को रोका जा सके।

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