नेशनल हाईवे-552 पर सोमवार रात एक खतरनाक और रोमांचक दृश्य देखने को मिला, जब एक लेपर्ड सड़क पर भैंस का शिकार करता हुआ दिखाई दिया। घटना रणथंभौर टाइगर रिजर्व के पेरीफेरी इलाके के कुशालीपुरा गांव के पास हुई, जहां जंगली जानवरों की आवाजाही आम है।
जानकारी के अनुसार, यह घटना सोमवार रात करीब 9 बजे हुई। लेपर्ड जंगल से बाहर निकलकर कुशालीपुरा गांव की ओर आया और वहां एक भैंस को शिकार कर लिया। इसके बाद वह सड़क किनारे बैठकर शिकार खाने लगा। हाईवे पर होने के कारण आसपास गुजर रहे राहगीरों और वाहन चालकों में अचानक हलचल मच गई।
मौके पर मौजूद राहगीरों ने गाड़ियों को रोककर दूरी बनाकर खड़े होकर लेपर्ड को देखा। जैसे ही गाड़ियों की लाइट पड़ी, लेपर्ड ने शिकार छोड़कर जंगल की ओर भागने का प्रयास किया। इस दौरान हाईवे पर वाहनों की गति धीमी हो गई और लोग सावधानी से अपना वाहन निकालते नजर आए।
स्थानीय लोगों और राहगीरों ने घटना का वीडियो भी बना लिया। वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि लेपर्ड शिकार खाते हुए सड़क किनारे बैठा है। वन विभाग और विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना टाइगर रिजर्व की पेरीफेरी इलाके में जंगली जानवरों की प्राकृतिक गतिविधि का हिस्सा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि रणथंभौर टाइगर रिजर्व के आसपास जंगली जानवरों का आवागमन आम है, लेकिन हाईवे जैसे प्रमुख रास्तों पर जानवरों का आना और शिकार करना सड़क हादसों और मानव-वन्यजीव संघर्ष का कारण बन सकता है। वन विभाग ने लोगों से आग्रह किया है कि इस क्षेत्र में रात के समय वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतें।
वन विभाग के अधिकारी ने बताया कि हाईवे पर जंगली जानवरों की आवाजाही रोकना मुश्किल है, लेकिन समय-समय पर सुरक्षात्मक उपाय किए जाते हैं। इस तरह की घटनाओं में लोगों को शांत और सुरक्षित दूरी बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा, शिकार करते हुए जानवरों के पास न जाना चाहिए।
स्थानीय लोग भी इस घटना से दहशत में थे, लेकिन उन्होंने कहा कि लेपर्ड ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। वन विभाग ने हाईवे के पास चेतावनी संकेतक और सड़क किनारे चेतावनी बोर्ड लगाने की योजना बनाई है, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों से बचा जा सके।
इस घटना ने एक बार फिर मानव-वन्यजीव संघर्ष की समस्या को उजागर किया है। जैसे-जैसे टाइगर रिजर्व के आसपास गांव और बस्ती विकसित हो रहे हैं, जंगली जानवर भी भोजन और आवास की तलाश में मानव क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए जागरूकता अभियान और सुरक्षित मार्ग बनाने की जरूरत है।
इस बीच, हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों से आग्रह किया गया है कि रात में तेज गति से वाहन न चलाएं और रास्ते में किसी भी जंगली जानवर को देख कर तुरंत वाहन धीमा करें। इससे मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

