वीडियो में जाने सवाई माधोपुर में एसीबी ने BDO और जिला परियोजना प्रबंधक को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) जयपुर की टीम ने सवाई माधोपुर में बड़ी कार्रवाई करते हुए जगदीश प्रसाद मीणा और अतिरिक्त प्रभार जिला परियोजना प्रबंधक को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के समय दोनों अधिकारियों के पास से कुल एक लाख रुपए की रिश्वत बरामद हुई।
एसीबी जयपुर नगर-प्रथम की टीम ने यह कार्रवाई ट्रैप कार्रवाई के तहत की। एसीबी के डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि गिरफ्तार BDO जगदीश प्रसाद मीणा पर गंभीर आरोप हैं। उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने शिकायतकर्ता और उसके दो साथियों से बीपीएम (जिला परियोजना प्रबंधक) पद से कार्यमुक्त न करने और लंबित यात्रा भत्ता एवं अन्य बिल पास कराने के एवज में प्रत्येक से 1 लाख रुपए रिश्वत की मांग की थी।
डीजी गोविंद गुप्ता ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद एसीबी टीम ने तत्काल जांच शुरू की और ट्रैप कार्रवाई कर अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का मकसद सरकारी अधिकारियों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
इस मामले ने सवाई माधोपुर में प्रशासनिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। अधिकारियों और आम जनता में चर्चा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में एसीबी की यह कार्रवाई न केवल चेतावनी स्वरूप है बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में भी कदम है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी पदों पर बैठे अधिकारी जो अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर नागरिकों और कर्मचारियों से रिश्वत मांगते हैं, उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि कानून सबके लिए समान है। साथ ही, यह लोगों में सरकारी तंत्र के प्रति विश्वास को भी मजबूत करता है।
पुलिस और एसीबी ने बताया कि आगे मामले की विस्तृत जांच जारी है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आरोपियों को कोर्ट में पेश कर उनके खिलाफ भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
सवाई माधोपुर में यह कार्रवाई स्थानीय प्रशासन और आम जनता दोनों के लिए संदेश है कि सरकारी पदों का दुरुपयोग और रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एसीबी की सतर्कता और तेज कार्रवाई से लोगों में भरोसा बढ़ा है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। कुल मिलाकर, एसीबी जयपुर की टीम की यह कार्रवाई भ्रष्टाचार रोधी प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे सरकारी तंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता को और बढ़ावा मिलेगा।

