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राजस्थान में घड़ियाल संरक्षण को नई रफ्तार, वीडियो में देंखे रणथंभौर रियरिंग सेंटर में 80 हैचलिंग्स शिफ्ट

राजस्थान में घड़ियाल संरक्षण को नई रफ्तार, वीडियो में देंखे रणथंभौर रियरिंग सेंटर में 80 हैचलिंग्स शिफ्ट

राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए वन विभाग ने घड़ियालों के बच्चों (हैचलिंग्स) को सुरक्षित वातावरण में संरक्षित करने का अभियान तेज कर दिया है। इसी कड़ी में सवाई माधोपुर स्थित रणथंभौर टाइगर रिजर्व के घड़ियाल रियरिंग सेंटर में 80 हैचलिंग्स को सफलतापूर्वक शिफ्ट किया गया है।

घड़ियाल संरक्षण के लिए विशेष अभियान

वन विभाग द्वारा घड़ियालों की घटती संख्या को ध्यान में रखते हुए संरक्षण और संवर्धन के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। रणथंभौर टाइगर रिजर्व की पालीघाट रेंज स्थित घड़ियाल रियरिंग सेंटर में सोमवार को 80 नवजात घड़ियालों को सुरक्षित रूप से स्थानांतरित किया गया।अधिकारियों के अनुसार, इससे पहले भी विभाग 100 हैचलिंग्स को इस केंद्र में शिफ्ट कर चुका है। इस तरह अब बड़ी संख्या में घड़ियाल शावकों को नियंत्रित और सुरक्षित वातावरण में पाला जा रहा है।

अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया केंद्र

डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि घड़ियालों के संरक्षण और प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप उनके पालन-पोषण के लिए रियरिंग सेंटर में आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं।शावकों के लिए विशेष रूप से नए टैंकों का निर्माण किया गया है, जहां उनके विकास और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाएगा। इन टैंकों में तापमान नियंत्रण और प्राकृतिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है।

शावकों के लिए बनाई गई विशेष व्यवस्था

रियरिंग सेंटर में लगाए गए नए टैंकों में थर्मल और डे-लाइट स्रोतों की व्यवस्था की गई है, जिससे घड़ियालों को उनके प्राकृतिक आवास जैसा वातावरण मिल सके।इसके अलावा आधुनिक वेव मेकर सिस्टम, नवीन बास्किंग प्लेटफॉर्म और चौबीसों घंटे निगरानी के लिए सुरक्षा कैमरे भी लगाए गए हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य शावकों की बेहतर वृद्धि, स्वास्थ्य और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

जैव विविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि घड़ियाल भारत की दुर्लभ और संकटग्रस्त प्रजातियों में शामिल हैं। ऐसे में उनके संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयास जैव विविधता को बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होंगे।वन विभाग का लक्ष्य है कि रियरिंग सेंटर में स्वस्थ रूप से विकसित होने के बाद इन घड़ियालों कोउपयुक्त प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाए, ताकि उनकी संख्या में वृद्धि हो सके और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिले। राजस्थान में घड़ियाल संरक्षण की यह पहल वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति सरकार और वन विभाग की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

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