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Rohtas प्रयोगशाला की जगह मालखनों में रह जाते हैं 50बिसरा, कैदी की मौत व हत्या के केस में संरक्षित वेसरा के भी भेजने में हो रहा है विलंब
 

Rohtas प्रयोगशाला की जगह मालखनों में रह जाते हैं 50बिसरा, कैदी की मौत व हत्या के केस में संरक्षित वेसरा के भी भेजने में हो रहा है विलंब


बिहार न्यूज़ डेस्क पोस्टमार्टम के दौरान जांच के लिये मृत व्यक्ति की संरक्षित बिसरा ससमय जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला नहीं भेजी जा रही है. इस कारण रिपोर्ट प्रभावित होने के आसार हैं. सूत्रों की मानें तो 50 फीसदी वेसरा जांच के लिए नहीं भेजे जाते हैं. हालांकि, कैदी की मौत व हत्या के मामले में बिसरा जांच को भेजी जाती है. लेकिन, ऐसे मामले में भी संरक्षित बिसरा को भेजने में भी विलंब की बातें सामने आ रही है. हालांकि, ऑन रिकॉर्ड पुलिस व स्वास्थ्य विभाग के कोई भी जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से बच रहा है.
प्राप्त जानकारी के अनुसार

पोस्टमार्टम के दौरान संरक्षित मृतकों के बिसरा को अस्पताल द्वारा थाने को दी जाती है. थाने को जांच के लिए बिसरा प्रयोगशाला में भेजने की जिम्मेवारी होती है. हालांकि, इसके लिए उन्हें अस्पताल से कागजात तैयार करनी होती है. लेकिन, पोस्टमार्टम के बाद बिसरा को जांच में भेजने में पुलिस व्यस्तता के कारण भूल रही है. कोई बड़ा मामला हो या फिर मृतक के परिजनों के एप्रोच पर बिसरा जल्दे भेजे जाते हैं. अन्यथा अधिकांश बिसरा घटना के राज खोलने के इंतजार में थाने के मालखाने में पड़े रहते हैं. सूत्रों की मानें तो बिसरा को जांच के लिए विज्ञान प्रयोगशाला भेजने की जगह थाने के कमरे में लंबे समय तक पड़ा रहता है. करीब 50 फीसदी वेसरा जांच के लिए प्रयोगशाला नहीं पहुंचता है. जो पहुंचते भी है तो काफी लेटलतीफी से ही. समय से पहुंचने वाले का आंकड़ा 20 फीसदी के करीब रह गया है. उधर, अस्पताल सूत्रों की मानें तो बिसरा जांच के लिये भेजने से पूर्व बनाये जाने वाले कागजात इस समय काफी कम बन रहे हैं.
कई थाने द्वारा सीधे बिसरा को प्रशासनिक अधिकारियों से भी अनुमति के बाद जांच के लिए भेजा जाता है. ऐसे में आंकड़ा बताना मुश्किल है कि कौन बिसरा जांच के लिये गया और कौन नहीं गया.

रोहतास न्यूज़ डेस्क
 

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