उन्होंने कहा कि चैंबर ने अक्तूबर माह में ही विभाग को अपनी आपत्ति और सुझाव देते हुए यह सुझाया था कि पूर्व की दर से अधिकतम 5 फीसदी वृद्धि ही की जाय। लेकिन, प्रतिवेदन पर बिना विचार किए नई दर को अव्यवहारिक रूप से प्रभावी कर दिया गया है। यह हमें मंजूर नहीं है। यह भी कहा कि नई दर के प्रभावी होने से एक फैक्ट्री पर सालाना एक करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जो अनुचित है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर जल्द विभागीय सचिव से मिलकर नई दरों पर पुनर्विचार का आग्रह किया जाएगा। साथ ही सभी चैंबर ऑफ कॉमर्स और औद्योगिक संगठनों से भी वार्ता की जाएगी। बैठक में प्रमुख क्षेत्रों में वाहनों की गति सीमा 20 किमी निर्धारित किए पर चर्चा हुई। कई सदस्यों ने इसे अव्यवहारिक बताया। साथ ही अप्रैल में चैंबर द्वारा लोहरदगा में बागवानी मिशन की योजनाओं पर किसानों के साथ कार्यशाला के आयोजन का निर्णय लिया गया।रांची न्यूज़ डेस्क!!!!