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Ranchi तैयारी झारखंड में शुरू होगा नवभारत साक्षरता कार्यक्रम, शिक्षा विभाग ने तय किया कार्यक्रम, 2027 तक चलेगी योजना, 100 साक्षरता का लक्ष्य
 

Ranchi तैयारी झारखंड में शुरू होगा नवभारत साक्षरता कार्यक्रम, शिक्षा विभाग ने तय किया कार्यक्रम, 2027 तक चलेगी योजना, 100 साक्षरता का लक्ष्य


झारखण्ड न्यूज़ डेस्क, झारखंड में शिक्षा की थीम पर नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा. इसके लिए अगले पांच साल का रोडमैप स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग ने तैयार कर लिया है. 2030 तक राज्य में सौ फीसदी साक्षरता का लक्ष्य रखा गया है. वर्तमान में 66.41 फीसदी आबादी साक्षर है.

कार्यक्रम के तहत 15 साल से अधिक उम्र के सभी युवा, महिला, बुजुर्गों, जो साक्षर नहीं हैं, उन्हें साक्षर बनाया जाएगा. इसमें अक्षर व संख्या का ज्ञान करवाया जाएगा. ताकि वे पढ़ना और लिखना सीख सकें. पांच साल तक चलने वाले कार्यक्रम में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मकता, महत्वपूर्ण जीवन कौशल, ह्ल बुनियादी शिक्षा (समानता),ह्व व्यावसायिक कौशल विकास औरह्व सतत शिक्षा के बारे में बताया जाएगा. इसके लिए सभी सामग्री और संसाधन डिजिटल रूप से प्रदान किए जाएंगे. टीवी, रेडियो, सेल फोन के माध्यम से जानकारी दी जाएगी.
महत्वपूर्ण जीवन कौशल प्रदान करना उद्देश्य 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के लोगों को महत्वपूर्ण जीवन कौशल प्रदान करना इसका उद्देश्य है. इन्हें बुनियादी शिक्षा प्रदान करना है. इसमें प्रारंभिक (कक्षा तीन से पांच) मध्य (कक्षा छह से आठवीं तक और माध्यमिक स्तर (कक्षा नौ से 12 तक) की जानकारी दी जाएगी. इसमें एनसीईआरटी और एनआईओएस का भी सहयोग लिया जाएगा. ऐसे लोगों को व्यावसायिक कौशल भी प्रदान किया जाएगा.
वयस्क नव-साक्षरों के लिए निरंतर सीखने की प्रक्रिया के रूप में स्थानीय रोजगार प्राप्त करने, कौशल विकास और अपग्रेडेशन के लिए कौशल शिक्षा भी प्रदान की जाएगी. इन्हें सतत शिक्षा मिले इस पर भी ध्यान दिया जाएगा. इसमें समग्र व्यस्क शिक्षा पाठ्यक्रम शामिल हैं. कला, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, संस्कृति, खेल, मनोरंजन के साथ ही अन्य विषय जिसमें नव साक्षरों को रूचि हो या उपयोगी हो उसकी जानकारी दी जाएगी.
स्वयंसेवी, शिक्षक व साक्षरता कार्यकर्ता करेंगे साक्षर
15 साल से ज्यादा उम्र के वैसे लोग जो पढ़ना-लिखना नहीं जानते हैं उन्हें स्वयंसेवी शिक्षक और साक्षरता कार्यकर्ता साक्षर करेंगे. इस काम के लिए उन्हें चयनित किया जाएगा और इसमें लगाया जाएगा. इसमें आठवीं या उससे अधिक शिक्षक व्यक्ति ही स्वयं सेवी शिक्षक बन सकेंगे. उन्हें मोबाइल फोन और कंप्यूटर चलाना आना अनिवार्य होगा. वहीं, जो व्यक्ति अपने स्वैच्छिक शिक्षा देनें में शामिल होना चाहते हैं उन्हें साक्षरता कार्यकर्ता कहा जाएगा. इस योजना की गतिविधियों में सेवाएं देने वाले को साक्षरता कार्यकर्ता कहा जाएगा.
स्कूल के पोषक क्षेत्र से निरक्षरों की होगी पहचान
स्कूल के पोषक क्षेत्र से निरक्षरों की पहचान की जाएगी और उन्हें साक्षरता अभियान से जोड़ा जाएगा. स्वयंसेवी शिक्षक व साक्षरता कार्यकर्ता को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी. वे घर-घर जाकर इसकी जानकारी लेंगे और उसी अनुसार उनका चयन करेंगे. यह कार्यक्रम स्कूलों, में विद्यालय अवधि के पहले या बाद या फिर अन्य सरकारी संस्थानों के भवनों में आयोजित किया जाएगा.

राँची न्यूज़ डेस्क !!!
 

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