राजसमंद में श्री द्वारकाधीश मंदिर में 84 खंभ झांकी के विशेष दर्शन, वीडियो में देंखे भक्तों की उमड़ी भारी भीड़
राजसमंद के कांकरोली स्थित श्री द्वारकाधीश मंदिर में रविवार देर शाम वर्ष में एक बार होने वाले 84 खंभ झांकी के विशेष दर्शन आयोजित किए गए। इस अवसर पर महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश सहित पूरे प्रदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मंदिर परिसर में भक्ति भाव से प्रभु के दर्शन किए।
मंदिर परिसर को विशेष रूप से सजाया गया था और भक्तजन झांकी के दर्शन के दौरान भक्ति रस में सराबोर नजर आए। पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार सजाई गई यह 84 खंभ झांकी भक्तों के लिए आध्यात्मिक अनुभव का माध्यम बन गई। झांकी का यह आयोजन न केवल परंपरा का प्रतीक है, बल्कि इसमें गहन आध्यात्मिक भावनाओं का समावेश भी होता है।
भक्तजन झांकी के दर्शन करते हुए भक्ति संगीत पर झूमते और प्रभु की लीलाओं का स्मरण करते नजर आए। मंदिर में आस्था का वातावरण हर तरफ महसूस किया जा सकता था। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने मंत्रोच्चारण और भजन-कीर्तन के माध्यम से अपनी भक्ति को व्यक्त किया।
विशेषज्ञों और पुरोहितों का कहना है कि चौरासी खंभों में सजाई गई झांकी का संबंध गोकुल स्थित नंद भवन से माना जाता है, जहां भगवान श्रीकृष्ण ने अपने प्रारंभिक साढ़े तीन वर्ष व्यतीत किए थे। इस धार्मिक आयोजन में भक्तजन न केवल झांकी का दर्शन करते हैं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का स्मरण भी करते हैं।
मंदिर के प्रबंधकों ने बताया कि इस वर्ष भी दर्शनार्थियों की संख्या में वृद्धि हुई है और कई श्रद्धालु पूरे दिन इंतजार के बाद दर्शन करने पहुंचे। सुरक्षा और व्यवस्था के लिए मंदिर प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे, ताकि भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन का लाभ मिल सके।
स्थानीय लोगों का कहना है कि 84 खंभ झांकी साल भर की आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक है और भक्तों के जीवन में आस्था और भक्ति की भावना को मजबूत करता है। भक्तजन अपने मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भी इस अवसर का लाभ उठाते हैं।
इस बार के आयोजन में मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे फूलों, दीपों और पारंपरिक सजावट से सजाया गया। भक्तों ने झांकी के दर्शन के बाद आरती में भाग लिया और भगवान द्वारकाधीश के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
इस प्रकार, राजसमंद के श्री द्वारकाधीश मंदिर में वर्ष में एक बार आयोजित 84 खंभ झांकी का यह आयोजन भक्ति और आस्था का महापर्व साबित हुआ। महाराष्ट्र, गुजरात और मध्यप्रदेश सहित प्रदेशभर से आए श्रद्धालुओं ने इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन और भक्ति रस का आनंद लिया।

