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Patna  कोसी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी नहीं सीएम
 

Patna  कोसी क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए संसाधनों की कमी नहीं सीएम


बिहार न्यूज़ डेस्क मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि वर्ष 2007-08 में कोसी त्रासदी आयी थी, जिसमें हम लोगों ने अपने संसाधन से उस क्षेत्र में काफी रिलीफ के कार्य किए थे. उसी दौरान पूरे इलाके को विकसित करने की योजना बनायी गयी थी. उस पर काम किया जा रहा है. हम वहां जाकर एक- एक चीजों को देखते रहे हैं. वहां किये जा रहे सभी कार्यों की जानकारी लेते रहते हैं. कोसी पुनर्वास परियोजना के तहत कई कार्य किए गए हैं. जो भी बचे हुए कार्य हैं उसे तेजी से पूरा किया जाएगा. इसके लिए संसाधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी.
 मुख्यमंत्री एक अणे मार्ग स्थित संकल्प में कोसी पुनर्वास परियोजना की कार्य प्रगति की समीक्षा कर रहे थे. बैठक में योजना एवं विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुणीश चावला ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बिहार कोसी बेसिन डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों के संबंध में विस्तृत जानकारी दी.

जल संसाधन विभाग के सचिव संजय कुमार अग्रवाल, कृषि सह पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग के सचिव एन सरवन कुमार, ग्रामीण कार्य विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल एवं बिहार राज्य पथ विकास निगम के प्रबंध निदेशक संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी ने अपने-अपने विभागों द्वारा कोसी पुनर्वास परियोजना के तहत किए जा रहे कार्यों की प्रगति के संबंध में जानकारी दी.बैठक में ऊर्जा सह योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के परामर्शी अंजनी कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त परामर्शी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य सचिव आमिर सुबहानी, विकास आयुक्त विवेक कुमार सिंह, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सह मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. एस सिद्धार्थ, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार मौजूद थे.
विश्व बैंक से ली जा रही है सहायता
इस योजना का मूल उद्देश्य वर्ष 2008 में कोसी नदी में आई भीषण बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र के ध्वस्त आधारभूत संरचना का पुनर्निर्माण और प्रभावित परिवारों का पुनर्वास करना था. इस योजना के तहत गृह, सड़क, पुल-पुलिये, बांध आदि और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार द्वारा विश्व बैंक की सहायता ली गयी है. इसे सहरसा, सुपौल व मधेपुरा जिले के 21 प्रखंडों में सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है. यह परियोजना 15 सितंबर 2010 में प्रारंभ होकर 31 दिसंबर 2018 को समाप्त हो चुका है.


पटना  न्यूज़ डेस्क
 

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