वीडियो में जाने गुर्जर समाज का बड़ा सामाजिक सुधार अभियान, शादी-ब्याह में शराब, अफीम और डोडा पर पूरी तरह बैन
राजस्थान के पांच जिलों के गुर्जर समाज ने सामाजिक कुरीतियों और फिजूलखर्ची के खिलाफ एक ऐतिहासिक और सख्त फैसला लेते हुए कई बड़े सामाजिक नियम लागू किए हैं। समाज की बैठक में तय किया गया कि अब किसी भी सामाजिक समारोह, खासकर शादी-विवाह में डोडा, अफीम और शराब जैसी नशे की चीजों की मनुहार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। समाज के इस फैसले को सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।बैठक में स्पष्ट किया गया कि यदि किसी आयोजन में नशे से जुड़ी वस्तुओं का इस्तेमाल या मेहमानों को पेशकश की गई, तो समाज के लोग वहां भोजन नहीं करेंगे और कार्यक्रम का बहिष्कार कर तुरंत लौट जाएंगे। इतना ही नहीं, नियम तोड़ने वाले व्यक्ति की सूचना तुरंत पुलिस को दी जाएगी और उस पर 2 लाख 51 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
समाज ने शादी समारोहों में दिखावे और पारंपरिक फिजूलखर्ची को रोकने के लिए भी कई अहम निर्णय लिए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उस फैसले की हो रही है, जिसमें तय किया गया कि शादी में दूल्हा क्लीन शेव रहेगा। समाज ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी युवक दाढ़ी या बिना शेव के शादी नहीं कर सकेगा।इसके अलावा समाज ने अन्य कई सामाजिक सुधारों को लेकर भी निर्णय लिए हैं। इनका उद्देश्य विवाह समारोहों को सादगीपूर्ण बनाना और युवा पीढ़ी को नशे तथा अनावश्यक खर्चों से दूर रखना बताया जा रहा है।
समाज के वरिष्ठ लोगों का कहना है कि लंबे समय से शादी और अन्य आयोजनों में नशे के बढ़ते चलन और दिखावे की प्रतिस्पर्धा से सामाजिक वातावरण प्रभावित हो रहा था। इससे आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा था। ऐसे में समाज ने सामूहिक रूप से सख्त नियम लागू करने का फैसला लिया है।गुर्जर समाज के इस फैसले की विभिन्न सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों द्वारा सराहना की जा रही है। कई लोगों का मानना है कि यदि अन्य समाज भी इस तरह की पहल करें तो सामाजिक कुरीतियों और फिजूलखर्ची पर काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि राजस्थान के ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों में सामाजिक आयोजनों में नशे और दिखावे पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक दबाव में आ जाते हैं। ऐसे में यह पहल समाज सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। फिलहाल गुर्जर समाज के इन फैसलों की पूरे प्रदेश में चर्चा हो रही है। लोग इसे सामाजिक बदलाव की नई शुरुआत के रूप में देख रहे हैं। वहीं समाज के पदाधिकारियों ने साफ किया है कि नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सामाजिक और कानूनी कार्रवाई दोनों की जाएंगी।

